ट्रंप का ब्रह्मास्त्र : ईरान पर जमीनी हमले के लिए तैयार USS त्रिपोली , क्या थम जाएगा युद्ध?
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मिडिल ईस्ट में तैनात हुआ अमेरिकी बाहुबली ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना सबसे शक्तिशाली ब्रह्मास्त्र रणक्षेत्र में उतार दिया है। विशालकाय युद्धपोत USS ट्रिपोली जापान से निकलकर मध्य पूर्व के समुद्री क्षेत्र में पहुंच चुका है। अमेरिका ने ईरान को 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव दिया है, जिसके लिए तेहरान के पास मात्र 10 दिन का समय है। यदि ईरान इसे स्वीकार नहीं करता, तो अमेरिका जमीनी हमले के लिए पूरी तरह तैयार है।

844 फीट लंबा और 50,000 टन वजनी लाइटनिंग कैरियर USS ट्रिपोली महज एक जहाज नहीं, बल्कि समुद्र में तैरता हुआ एक सैन्य एयरबेस है। 844 फीट लंबा और 50,000 टन वजनी यह एम्फीबियस असॉल्ट शिप समुद्र से जमीन पर सीधा हमला करने में माहिर है। इसे लाइटनिंग कैरियर भी कहा जाता है क्योंकि यह आधुनिक F-35 लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर जेट्स, MV-22 ऑस्प्रे विमान और MH-60 सीहॉक हेलीकॉप्टरों से लैस है।

समुद्र का रैपिड-रिस्पॉन्स फोर्स इस युद्धपोत पर अमेरिका की 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट तैनात है, जिसमें 2,200 से अधिक मरीन कमांडो शामिल हैं। ये सैनिक दुनिया के किसी भी कोने में तुरंत कार्रवाई करने वाली रैपिड-रिस्पॉन्स फोर्स का हिस्सा हैं। ये कमांडो न केवल हवाई और जमीनी युद्ध में माहिर हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर संकट में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने (इवेक्यूएशन) में भी सक्षम हैं।

एक तैरता हुआ हथियारों और सैनिकों का शहर USS ट्रिपोली की एक अनूठी विशेषता यह है कि इसमें वेल डेक के बजाय विशाल हैंगर का उपयोग किया जाता है। यह शिप विमानों के रखरखाव, मरम्मत और हथियारों के भंडारण के लिए एक वर्कशॉप की तरह काम करता है। इसमें 3,000 से 5,000 सैनिकों के रहने की पूरी व्यवस्था है। जरूरत पड़ने पर यह अन्य युद्धपोतों के विमानों की मरम्मत भी कर सकता है, जिससे यह समुद्र में एक आत्मनिर्भर सैन्य इकाई बन जाता है।

हमले का लक्ष्य: खर्ग आइलैंड से होर्मुज स्ट्रेट तक सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध की नौबत आई, तो अमेरिका का सीधा निशाना ईरान का खर्ग आइलैंड (Kharg Island) और साउथ पार्स प्लांट होगा। इतना ही नहीं, इस हमले के जरिए अमेरिका रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट पर पूरी तरह से अपना कब्जा जमा सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें ईरान के जवाब पर टिकी हैं कि क्या वह शांति का रास्ता चुनेगा या विनाशकारी जमीनी जंग का सामना करेगा।

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