ईरान के द्वीपों पर अमेरिका की अंतिम प्रहार वाली रणनीति, क्या होर्मुज में छिड़ने वाली है बड़ी जंग?
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मिडिल ईस्ट में तनाव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने पश्चिम एशिया में 5,000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती के साथ ही ईरान के रणनीतिक द्वीपों पर अपनी पैनी नजर गड़ा दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन द्वीपों पर कब्जे की संभावना से इनकार नहीं किया है, जिससे क्षेत्र में एक नए और बड़े सैन्य संघर्ष की आहट सुनाई दे रही है।

रणनीतिक महत्व के द्वीप और अमेरिका का लक्ष्य फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित अबू मूसा, ग्रेटर टुनब और लेसर टुनब द्वीप सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। ये द्वीप 39 किलोमीटर चौड़े होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर हैं, जो दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई का मुख्य रास्ता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पेंटागन इन द्वीपों पर कब्जे के सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है ताकि ईरान पर होर्मुज मार्ग खोलने का दबाव बनाया जा सके।

UAE का दावा और ईरान की घेराबंदी इन तीन द्वीपों का प्रशासन वर्तमान में ईरान के हाथ में है, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात लंबे समय से इन पर अपना मालिकाना हक जताता रहा है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स और पेंटागन की योजनाओं में केवल यही तीन द्वीप नहीं, बल्कि खार्ग, क़ेशम और लारक जैसे अन्य महत्वपूर्ण ईरानी द्वीप भी शामिल हैं। हालांकि, ईरान ने इन द्वीपों पर मीडियम रेंज की मिसाइलें तैनात कर रखी हैं, जिससे अमेरिका के लिए यह दांव जोखिम भरा हो सकता है।

खार्ग द्वीप पर पहले ही हो चुका है शक्ति प्रदर्शन बीते 14 मार्च को अमेरिका ने ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र—खार्ग द्वीप—पर अब तक की सबसे शक्तिशाली बमबारी की थी। ट्रंप ने इसे इतिहास का सबसे शक्तिशाली हमला करार दिया। हालांकि, उन्होंने तेल के बुनियादी ढांचे को सुरक्षित रखने का दावा किया, लेकिन खार्ग द्वीप को निशाना बनाकर अमेरिका ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने का स्पष्ट संदेश दे दिया है।

ईरान ने दी कड़ी चेतावनी ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर ग़ालिबाफ ने इन योजनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की हर गतिविधि पर नजर रख रहा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी क्षेत्रीय देश की मदद से उनके द्वीपों पर हमला हुआ, तो वे उस देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को अपने निरंतर हमलों का निशाना बना देंगे।

क्या युद्ध का दायरा बढ़ने वाला है? 28 फरवरी से जारी अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान को भारी नुकसान हुआ है। अब द्वीपों पर कब्जे की चर्चा ने इस जंग को एक नए मोड़ पर खड़ा कर दिया है। यदि अमेरिका वास्तव में इन द्वीपों पर धावा बोलता है, तो यह लड़ाई केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और पूरे मिडिल ईस्ट के भूगोल को बदल सकती है।

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