LPG संकट का सच: क्या भारत में खत्म हो जाएगा ईंधन? सरकार ने बताया अपना मास्टर प्लान
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ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगा दी है। भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर 140 डॉलर के पार पहुंच गई है। ऐसे में आम जनता के मन में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की किल्लत को लेकर डर पैदा होना लाजिमी है।

हालांकि, सरकार ने इन आशंकाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है। भारत के पास अगले दो महीनों के लिए तेल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है।

घरेलू प्रोडक्शन में 40% का उछाल

सुजाता शर्मा के अनुसार, सरकार ने हालात को काबू में रखने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि हमारी रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से अधिक काम कर रही हैं, जिससे घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 40% की वृद्धि हुई है। चूंकि भारत अपनी 90% एलपीजी जरूरतों के लिए होर्मुज स्ट्रेट के आयात पर निर्भर है, इसलिए सरकार ने सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाई है।

कमर्शियल सप्लाई पर क्यों लगा अंकुश?

सरकार ने प्राथमिकता तय करते हुए घरेलू उपभोक्ताओं को सबसे ऊपर रखा है। शुरुआती दौर में कमर्शियल एलपीजी सप्लाई पर रोक लगाई गई थी, जिसे बाद में फीडबैक के आधार पर धीरे-धीरे बहाल किया गया।

वर्तमान में कमर्शियल सप्लाई को धीरे-धीरे बढ़ाकर 70% तक कर दिया गया है। 14 मार्च से अब तक लगभग 30,000 टन कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति की जा चुकी है, जिसमें रेस्टोरेंट, होटल, इंडस्ट्रियल कैंटीन और निर्माण क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है।

प्रवासी मजदूरों तक पहुंची मदद

सरकार ने सामाजिक सुरक्षा का ध्यान रखते हुए प्रवासी मजदूरों के लिए भी विशेष कदम उठाए हैं। अब तक लगभग 30,000 छोटे 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर बांटे गए हैं। मंत्रालय का साफ संदेश है कि पेट्रोल पंपों पर लगने वाली भीड़ केवल अफवाहों का नतीजा है, जबकि हकीकत में देश में ईंधन का कोई संकट नहीं है।

तेल महंगा, लेकिन दाम स्थिर

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 140 डॉलर प्रति बैरल के पास है, तो भारत में तेल क्यों नहीं महंगा हो रहा? सरकार ने दावा किया है कि दुनिया के कई पड़ोसी देशों के विपरीत, भारत ने अपनी जनता पर बोझ नहीं डाला है और पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखी गई हैं। सरकार का दावा है कि उनके पास 60 दिनों का बफर स्टॉक तैयार है, जिससे आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा नहीं आएगी।

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