27 की उम्र में गुमनामी में खो गया यह जादुई स्पिनर, कभी सचिन के विदाई मैच का बना था हीरो
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भारतीय क्रिकेट इतिहास में ऐसे कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी रहे हैं, जिनका करियर उम्मीदों के मुताबिक लंबा नहीं चल सका। एक ऐसा ही नाम है बाएं हाथ के फिरकी गेंदबाज प्रज्ञान ओझा का, जिन्होंने अपनी गेंदबाजी से बड़े-बड़े बल्लेबाजों को नचाया, लेकिन महज 27 साल की उम्र में उनका अंतरराष्ट्रीय करियर एक रहस्यमयी मोड़ पर आकर ठहर गया।

एक शानदार शुरुआत और जादुई गेंदबाजी प्रज्ञान ओझा ने 10 साल की उम्र से ही क्रिकेट का बल्ला और गेंद थाम ली थी। साल 2008 में उन्होंने टीम इंडिया में कदम रखा। उस समय भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की करना किसी जंग से कम नहीं था, क्योंकि ओझा की प्रतिस्पर्धा हरभजन सिंह, आर अश्विन और रवींद्र जडेजा जैसे दिग्गजों से थी। बावजूद इसके, ओझा ने अपनी जादुई स्पिन से जल्द ही खुद को साबित किया।

सचिन का विदाई मैच और ओझा का जलवा नवंबर 2013 में जब महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच (वेस्टइंडीज के खिलाफ) खेल रहे थे, तब प्रज्ञान ओझा ने भी इतिहास रचा था। मुंबई टेस्ट की दोनों पारियों में ओझा ने 5-5 विकेट चटकाकर कुल 10 विकेट लिए और प्लेयर ऑफ द मैच बने। किसी ने नहीं सोचा था कि यह मैच सचिन के साथ-साथ ओझा के अंतरराष्ट्रीय करियर का भी आखिरी मैच साबित होगा।

करियर पर ग्रहण और एक्शन पर सवाल ओझा के करियर के ढलान की असली वजह उनके गेंदबाजी एक्शन पर उठे सवाल थे। हालांकि, उन्होंने कड़ी मेहनत की, अपने एक्शन में सुधार किया और ICC से क्लीन चिट भी हासिल की। लेकिन तब तक टीम इंडिया का समीकरण पूरी तरह बदल चुका था। तत्कालीन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की पसंद रवींद्र जडेजा बन चुके थे, जो बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों में टीम को संतुलन दे रहे थे। ओझा फिर कभी मुख्य टीम में वापसी नहीं कर सके।

संन्यास से सिलेक्शन कमेटी तक का सफर वापसी की उम्मीद में 7 साल तक संघर्ष करने के बाद, ओझा ने 21 फरवरी 2020 को क्रिकेट के सभी प्रारूपों को अलविदा कह दिया। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने कॉमेंट्री की दुनिया में कदम रखा। उनकी काबिलियत को देखते हुए हाल ही में बीसीसीआई ने उन्हें सीनियर मेंस सिलेक्शन कमेटी में शामिल किया है।

एक नजर करियर के आंकड़ों पर प्रज्ञान ओझा ने 2008 से 2013 के बीच भारत के लिए 24 टेस्ट में 113 विकेट, 18 वनडे में 21 और 6 टी20 इंटरनेशनल में 10 विकेट चटकाए। इसके अलावा आईपीएल में भी उन्होंने 92 मैचों में 89 विकेट अपने नाम किए। आज वे उसी टीम के लिए खिलाड़ी चुन रहे हैं, जिसका हिस्सा बनने का सपना उन्होंने कभी मैदान पर देखा था।

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