# ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा: हॉर्मुज के खतरनाक रास्तों से भारत की तेल आपूर्ति सुनिश्चित कर रही नौसेना
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देश की ऊर्जा जरूरतों को बनाए रखने के लिए भारतीय नौसेना ने मोर्चा संभाल लिया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच, भारतीय जहाजों को सुरक्षित भारत लाने के लिए नौसेना ने ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा शुरू किया है। इस मिशन का उद्देश्य किसी भी संभावित संकट के दौरान देश में तेल और गैस की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करना है।

क्या है ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा ?

हॉर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक है। खतरे को देखते हुए, भारतीय नौसेना ने अपने पांच अत्याधुनिक युद्धपोतों को इस क्षेत्र में तैनात किया है। ये जहाज हॉर्मुज से निकलने वाले व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा घेरा प्रदान कर उन्हें सुरक्षित भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचा रहे हैं। अब तक 4 बड़े जहाज सुरक्षित पहुंच चुके हैं और जल्द ही 20 से 22 और जहाजों को लाने की योजना है।

सुरक्षा का घेरा: कैसे काम करती है नेवी?

हॉर्मुज से निकलने के बाद, ओमान की खाड़ी में भारतीय नौसेना के जहाज इन व्यापारिक जहाजों से संपर्क साधते हैं। इन्हें एक सुरक्षित मार्ग की जानकारी दी जाती है, जिसके बाद नौसैनिक जहाज इन्हें अपने सुरक्षा घेरे में लेकर उत्तरी अरब सागर और फिर भारत तक पहुंचाते हैं। पूरी यात्रा के दौरान कप्तान को समुद्री स्थिति और मौसम की रियल-टाइम जानकारी दी जाती है।

10 किलोमीटर की दूरी का रहस्य

भारतीय नौसेना व्यापारिक जहाज और अपने युद्धपोत के बीच करीब 10 किलोमीटर का फासला रखती है। इसके दो मुख्य कारण हैं:

  1. सुरंगों से बचाव: नौसेना के जहाज आगे चलकर पानी में बिछी बारूदी सुरंगों (Sea Mines) का पता लगाते हैं, ताकि व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल सके।
  2. हमले से ढाल: यदि कोई हमलावर घात लगाकर बैठा हो, तो उसे सबसे पहले नौसेना के युद्धपोत का सामना करना पड़ेगा, जिससे व्यापारिक जहाज सुरक्षित रहते हैं। साथ ही, जहाज के पीछे भी एक नेवी का जहाज सुरक्षा के लिए तैनात रहता है।

नौसेना की ब्रह्मोस ताकत

इस मिशन में INS सूरत, INS कोच्चि, INS चेन्नई, INS तलवार और विशाखापट्टनम श्रेणी के विध्वंसक (Destroyer) जहाज शामिल हैं। हर एक जहाज पर 300 से अधिक नौसैनिक तैनात होते हैं। ये जहाज 16 ब्रह्मोस और 32 बराक मिसाइलों से लैस हैं। इसके अलावा, समुद्र के नीचे के खतरों के लिए 6 टॉरपीडो और आकाश मार्ग की निगरानी के लिए दो हेलीकॉप्टर हमेशा तैयार रहते हैं।

सबसे आगे भारत

हॉर्मुज के रास्ते में कुल 6 देशों की नौसेनाएं अपने जहाजों को सुरक्षा दे रही हैं, लेकिन भारत ने सबसे पहले और बड़े पैमाने पर इस सुरक्षा अभियान को शुरू किया है। ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा असल में भारतीय नौसेना के ऑपरेशन संकल्प का ही विस्तार है, जिसका मुख्य लक्ष्य अरब सागर में सुरक्षित समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करना है। भारत की यह सतर्कता न केवल व्यापारिक हितों की रक्षा कर रही है, बल्कि देश को किसी भी संभावित ऊर्जा संकट से महफूज रखे हुए है।

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