नरहरी झिरवाल के खिलाफ शिंदे गुट का अल्टीमेटम , शाइना एनसी ने मांगा इस्तीफा
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महाराष्ट्र की राजनीति में नरहरी झिरवाल का एक कथित आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। अब सत्ताधारी महायुति गठबंधन में शामिल शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) ने भी उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने कड़े शब्दों में कहा है कि नरहरी झिरवाल को अपने पद से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक इस मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनका पद पर बने रहना उचित नहीं है। शाइना ने कहा, राजनीति में नैतिकता सर्वोपरि है। यदि आप सच हैं, तो अदालत में यह साबित हो जाएगा, लेकिन अंतरात्मा की आवाज पर उन्हें पद छोड़ना चाहिए।

विवादों से पुराना नाता शाइना एनसी ने जिरवाल के पिछले रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए। उन्होंने याद दिलाया कि यह पहली बार नहीं है जब जिरवाल विवादों में हैं। इससे पहले भी उनके कार्यालय से भ्रष्टाचार के कई गंभीर मामले सामने आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति का नाम ऐसे मामलों में आना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

अशोक खरात मामले में SIT का रुख महिला सुरक्षा के मुद्दे पर शाइना एनसी ने कड़ा रुख अपनाते हुए अशोक खरात मामले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधियों के लिए समाज में कोई जगह नहीं है। सरकार ने इस मामले की जांच के लिए SIT (विशेष जांच दल) गठित की है। उन्होंने जनता से अपील की है कि अगर किसी के पास शोषण से जुड़ा कोई सबूत या वीडियो है, तो वे बिना डरे सामने आएं ताकि दोषियों को सजा मिल सके।

महंगाई और सब्सिडी पर सरकार का बचाव विवादों के बीच शाइना एनसी ने देश की आर्थिक स्थिति पर भी बात की। उन्होंने महंगाई के लिए वैश्विक युद्धों और अस्थिर परिस्थितियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने पेट्रोल और एलपीजी की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए प्रयास किए हैं।

साथ ही, उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत लाभार्थियों को ₹300 की सब्सिडी दी जा रही है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम को सख्ती से लागू किया गया है ताकि कालाबाजारी को रोका जा सके।

नारी शक्ति को प्राथमिकता अंत में, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व की तारीफ की। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल और लाडकी बहिन जैसी योजनाओं ने यह साबित कर दिया है कि नारी शक्ति केवल एक नारा नहीं, बल्कि धरातल पर एक हकीकत है। इन योजनाओं ने महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में मुख्यधारा से जोड़ा है।

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