मिडिल ईस्ट में आग और भारत की चिंता: PM मोदी ने बुलाई इमरजेंसी बैठक, ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का एक्शन प्लान
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नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में छिड़े युद्ध ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस गंभीर संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित अपने आवास पर एक हाई-लेवल इमरजेंसी बैठक बुलाई है। करीब साढ़े तीन घंटे तक चली इस बैठक में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को सुरक्षित रखने पर मंथन किया गया।

बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद? इस उच्च स्तरीय बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 13 कैबिनेट मंत्रियों सहित सरकार के शीर्ष अधिकारी शामिल रहे। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ ही पीयूष गोयल, हरदीप सिंह पुरी, अश्विनी वैष्णव और शिवराज सिंह चौहान जैसे वरिष्ठ मंत्री मौजूद थे। साथ ही, एनएसए अजीत डोभाल और पीएम के दोनों प्रिंसिपल सेक्रेटरी भी चर्चा का हिस्सा बने।

ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकस बैठक का मुख्य केंद्र कच्चे तेल, गैस, बिजली और फर्टिलाइजर की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना था। युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। सरकार इस बात को लेकर सतर्क है कि देश में ईंधन और बिजली की कमी न हो। प्रधानमंत्री मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि मौजूदा वैश्विक ऊर्जा संकट एक कठिन परीक्षा है, जिससे शांति और धैर्य के साथ निपटना होगा।

क्या है मिडिल ईस्ट संकट की जड़? 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद क्षेत्र में युद्ध भड़क गया। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों में तनाव पैदा कर दिया है। सबसे बड़ी चुनौती होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर है, जो दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य समुद्री मार्ग है। ईरान द्वारा इस रास्ते को बाधित करने से ईंधन की ढुलाई पर गंभीर असर पड़ा है, जिससे भारत सहित कई देश मुश्किल में हैं।

पीएम मोदी की कूटनीतिक सक्रियता संकट की शुरुआत से ही प्रधानमंत्री मोदी पूरी दुनिया के संपर्क में हैं। वे सऊदी अरब, यूएई, कतर, इजराइल, ईरान, फ्रांस और अमेरिका समेत कई देशों के शीर्ष नेताओं से लगातार फोन पर बातचीत कर रहे हैं। भारत का लक्ष्य इस संकट के असर को कम करना और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए आपूर्ति श्रृंखला को सामान्य बनाए रखना है। सरकार इस दिशा में लगातार सक्रिय कदम उठा रही है।

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