दुनिया गोल है और अब वक्त का पहिया घूम चुका है। कभी यूक्रेन युद्ध में रूस को उलझाने वाला अमेरिका अब खुद उसी जाल में फंसता नजर आ रहा है। ईरान के साथ जारी संघर्ष 20 दिनों को पार कर चुका है और इसके संकेत साफ हैं कि यह युद्ध अब लंबा खिंचेगा।
यूक्रेन का रूस मॉडल अब अमेरिका पर लागू रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत में अमेरिका ने पर्दे के पीछे से यूक्रेन को भरपूर सैन्य और लॉजिस्टिक समर्थन दिया था, जबकि सार्वजनिक रूप से वह खुद को युद्ध से दूर बताता रहा। अब ठीक वही रणनीति पुतिन अपना रहे हैं। रूस सामने से तो शांति की बात कर रहा है, लेकिन पर्दे के पीछे ईरान को खुफिया जानकारी और हथियारों से लैस कर रहा है।
पुतिन की सहानुभूति में छिपी चाल रक्षा विशेषज्ञ रिटायर्ड कर्नल राजेश पवार के अनुसार, अमेरिका लगातार रूस से अपील कर रहा है कि वह इस युद्ध को खत्म करने में मदद करे। जवाब में पुतिन सिर्फ सहानुभूति का दिखावा कर रहे हैं। रूस की मंशा साफ है—वह चाहता है कि अमेरिका इस युद्ध में जितना हो सके, उतना उलझा रहे। इसी का नतीजा है कि अमेरिका ईरान को कोई बड़ा नुकसान पहुंचाने में नाकाम साबित हो रहा है।
तेल के खेल में रूस की बल्ले-बल्ले इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा विजेता रूस बनकर उभरा है। ईरान से तेल की सप्लाई घटने के कारण वैश्विक बाजार में हाहाकार मचा है। यूरोपीय देशों के भारी दबाव के आगे झुकते हुए अमेरिका को मजबूरन रूस से तेल खरीदने की अनुमति देनी पड़ी है। अब रूस अपनी शर्तों पर, मनमाने दाम में तेल बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है।
ट्रंप का सरकारी बयान बनाम अंदरूनी डर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही कैमरे के सामने यह दावा कर रहे हों कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन हकीकत कुछ और है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वह क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों को नहीं भेजेंगे। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख उनकी मजबूरी को दर्शाता है। अमेरिका के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह ईरान-रूस के इस गठबंधन को कैसे तोड़े।
शक्ति संतुलन में पुतिन का दबदबा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के बीच के मजबूत संबंध अब अमेरिका के लिए सिरदर्द बन गए हैं। पुतिन इस युद्ध का उपयोग दुनिया पर अपना दबदबा फिर से कायम करने के लिए कर रहे हैं। एक तरफ अमेरिका ईरान के हमलों और इजरायल के साथ बढ़ रहे तनाव से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर रूस अपनी खोई हुई साख को तेजी से रिकवर कर रहा है।
आने वाले दिनों में यह युद्ध अमेरिका की वैश्विक स्थिति तय करेगा। क्या ट्रंप इस जाल से निकल पाएंगे, या पुतिन की चाल अमेरिका को और गहरे संकट में धकेल देगी? फिलहाल, बाजी रूस के हाथ में नजर आ रही है।
Washington, US: On being asked if he intends to lift sanctions on Iranian oil and intends to potentially put U.S. troops in the region, US President Donald Trump says, No, I m not putting troops anywhere. If I were, I certainly wouldn t tell you. I actually thought when I did… pic.twitter.com/JO6ATkxaOT
— ANI (@ANI) March 19, 2026
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