जो बोलेगा, वो मरेगा! ईरान में 19 साल के पहलवान समेत 3 को सरेआम दी गई फांसी
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इस्लामिक शासन का खौफनाक चेहरा ईरान इन दिनों बाहरी मोर्चों पर जूझ रहा है, लेकिन अपने ही देश में उसका कट्टरपन और अधिक हिंसक हो गया है। इस्लामिक शासन के खिलाफ आवाज उठाने के जुर्म में शुक्रवार को तीन युवाओं को सरेआम फांसी पर लटका दिया गया। इनमें 19 वर्षीय उभरते हुए पहलवान सालेह मोहम्मदी भी शामिल थे।

क्रेन से लटकाकर दी गई मौत यह खौफनाक घटना शियाओं के पवित्र शहर कोम में हुई। सालेह मोहम्मदी के अलावा सईद दावोदी और मेहदी गासेमी को भी क्रेन की मदद से फांसी दी गई। इन तीनों पर 8 जनवरी 2026 को हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान दो पुलिसकर्मियों की हत्या का आरोप था। यह फांसी बड़ी संख्या में मौजूद भीड़ के बीच दी गई, ताकि समाज में दहशत का माहौल बनाया जा सके।

यातना देकर कबूलवाए गुनाह ईरान ह्यूमन राइट्स (IHRNGO) ने इस घटना की तीखी आलोचना की है। संगठन के निदेशक महमूद अमीरी-मोघद्दम का कहना है कि इन युवाओं को भीषण यातनाएं देकर जबरन जुर्म कबूलवाए गए थे। उन्हें अपना बचाव करने का निष्पक्ष मौका तक नहीं दिया गया। इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन और एक्स्ट्रा जुडिशियल किलिंग करार दिया गया है।

आगे और भी हो सकती हैं हत्याएं मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह फांसी सिर्फ एक शुरुआत है। सरकार का मकसद राजनीतिक असंतोष को पूरी तरह कुचलना है। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शनों में शामिल अन्य लोगों को भी सामूहिक रूप से फांसी दी जा सकती है। यह ईरानी नागरिकों के लिए एक बड़ा और वास्तविक खतरा है।

खिलाड़ियों को निशाना बना रहा शासन पूर्व एथलीट और मानवाधिकार कार्यकर्ता नीमा फार ने इसे ईरान सरकार की सोची-समझी रणनीति बताया। उन्होंने कहा कि ईरान अपने ही खिलाड़ियों को निशाना बनाकर समाज में डर पैदा कर रहा है। 2020 में पहलवान नविद अफकारी की फांसी भी इसी पैटर्न का हिस्सा थी। आलोचकों का मानना है कि शासन अपने अस्तित्व को बचाने के लिए जनता की आवाज को खामोश कर रहा है।

खेल जगत से ईरान को बैन करने की मांग इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध के सुर तेज हो गए हैं। मांग की जा रही है कि जब तक ईरान विरोध प्रदर्शन करने वालों को फांसी देना बंद नहीं करता और बेगुनाह प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं करता, तब तक उसे सभी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं से प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की गई है।

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