मातम के बाद महा-जवाब: ईरान का इजरायल पर भीषण हमला, तेल अवीव से दोहा तक दहली धरती
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ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। युद्ध के 18वें दिन इजरायल द्वारा तेहरान में किए गए हवाई हमलों ने आग में घी डालने का काम किया है। इस हमले में ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी और बसीज बलों के कमांडर गुलारजा सुलेमानी की मौत हो गई। इन वरिष्ठ नेताओं की मौत के बाद ईरान में शोक की लहर दौड़ गई, लेकिन तेहरान ने इसे बड़े जवाबी हमले के साथ खत्म कर दिया।

तेल अवीव में तबाही के निशान ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल के तेल अवीव को निशाना बनाया। सविधोर सेंट्रल ट्रेन स्टेशन पर ईरानी क्लस्टर बमों की बारिश हुई, जिससे इलाके में भारी तबाही मची है। हमले के बाद मची अफरा-तफरी और मौके से आ रही तस्वीरों ने युद्ध की भयावहता को जगजाहिर कर दिया है। हताहतों की सटीक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन नुकसान काफी बड़ा बताया जा रहा है।

दोहा और बुशहर तक फैली आंच ईरान का गुस्सा सिर्फ इजरायल तक सीमित नहीं रहा। कतर की राजधानी दोहा में भी धमाकों की आवाजें सुनी गईं। कतर के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि ईरान की मिसाइलों को उनकी सेना ने हवा में ही मार गिराया। वहीं, ईरान के बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट पर भी मिसाइलें दागी गईं। गनीमत रही कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, इस परमाणु संयंत्र को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।

दुबई और सऊदी की प्रतिक्रिया ईरान ने दुबई पर भी ड्रोन और मिसाइलें दागीं, जिन्हें एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते निष्क्रिय कर दिया। इस लगातार बढ़ते तनाव को देखते हुए सऊदी अरब ने रियाद में अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा क्षेत्रीय सुरक्षा और युद्ध को रोकने के उपाय तलाशना है।

संयुक्त राष्ट्र में ईरान का बड़ा दावा संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत आमिर सईद इरवानी ने अमेरिका और इजरायल पर तीखा हमला बोला है। उनके दावे के अनुसार, अब तक की लड़ाई में 1300 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं, मानवाधिकार मानिटरिंग संस्था HRANA का अनुमान है कि हताहतों की संख्या 1858 तक पहुंच सकती है।

परमाणु खतरे की चेतावनी IAEA प्रमुख राफेल ग्रासी ने वैश्विक समुदाय को आगाह किया है। उन्होंने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने का आग्रह किया है ताकि कोई परमाणु दुर्घटना या बड़ी त्रासदी न हो। युद्ध के 19वें दिन की शुरुआत के साथ ही दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह संघर्ष और फैलेगा या कूटनीतिक दबाव से इसे थामने में मदद मिलेगी।

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