क्या 75 की उम्र में राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए? मोहन भागवत ने दिया स्पष्ट जवाब
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दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने 75 वर्ष की आयु के बाद राजनीति से संन्यास लेने के सवाल पर अपनी राय स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह बात मोरोपंत जी के बयान का हवाला देते हुए उनके विचार रखे थे।

भागवत ने कहा, मैंने यह नहीं कहा कि मैं रिटायर हो जाऊंगा या किसी और को रिटायर हो जाना चाहिए। हम जिंदगी में किसी भी समय रिटायर होने के लिए तैयार हैं और संघ हमसे जिस भी समय तक काम कराना चाहेगा, हम संघ के लिए उस समय तक काम करने के लिए भी तैयार हैं।

उन्होंने घुसपैठ के मुद्दे पर भी बात की। भागवत ने कहा कि घुसपैठ को रोकना चाहिए और सरकार इस दिशा में प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यह समाज के हाथों में है कि वह अपने देश में रोजगार अपने देश के लोगों को दे। उन्होंने कहा कि भारत में मुसलमान भी नागरिक हैं और उन्हें भी रोजगार की जरूरत है। बाहर से आने वालों को रोजगार क्यों दिया जाए? उनके देश की व्यवस्था उन्हें करनी चाहिए।

भागवत ने इस्लाम को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इस्लाम पहले दिन जब भारत में आया, उस दिन से यहां है और रहेगा। उन्होंने कहा कि जो हिन्दू यह सोचता है कि इस्लाम नहीं रहेगा, वह हिन्दू सोच का नहीं है। भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों जगह यह विश्वास बनना चाहिए कि हम सब एक हैं, तभी यह संघर्ष खत्म होगा।

जनसंख्या नियंत्रण पर बात करते हुए भागवत ने कहा कि दुनिया में सभी शास्त्र कहते हैं कि जिन देशों की जन्म दर 3 से कम होती है, वे धीरे-धीरे लुप्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों का कहना है कि विवाह में देर न करने और 3 संतान करने से माता-पिता और संतानों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। उन्होंने कहा कि भारतवर्ष के प्रत्येक नागरिक को यह देखना चाहिए कि उसके घर में 3 संतान होनी चाहिए।

भाजपा और RSS के बीच मतभेद की खबरों पर भागवत ने कहा कि मतभेद के कोई मुद्दे नहीं होते। उन्होंने कहा कि उनके यहां विचारों में कुछ मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद बिल्कुल नहीं है। उन्होंने कहा कि एक दूसरे पर विश्वास है और यह कहना गलत है कि भाजपा सरकार में सब कुछ RSS तय करता है।

भागवत ने कहा कि वे सरकार को सलाह दे सकते हैं, लेकिन फैसले उनके अपने क्षेत्रों में होते हैं। उन्होंने कहा कि वे तय करते तो इतना समय नहीं लगता।

भाजपा के अलावा अन्य राजनीतिक दलों को RSS द्वारा समर्थन न देने के सवाल पर भागवत ने कहा कि अच्छे काम के लिए जो भी उनसे सहायता मांगता है, वे उन्हें सहायता देते हैं। उन्होंने कहा कि जो दूर भागते हैं, उन्हें सहायता नहीं मिलती तो वे क्या करें। उन्होंने कहा कि उनकी तरफ से कोई रुकावट नहीं है। अगर उधर से रुकावट है तो वे उनकी इच्छा का सम्मान करके रुक जाते हैं।

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