नई दिल्ली: हाल ही में भारत सरकार और अमेरिकी लॉबिंग फर्मों के बीच संबंधों को लेकर छिड़े विवाद पर विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ा रुख अपनाया है। मंत्रालय ने इन रिपोर्ट्स को भ्रामक करार देते हुए स्पष्ट किया है कि भारत किसी भी तरह की गुप्त गतिविधि में शामिल नहीं है, बल्कि यह एक सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास 1948 से ही अमेरिकी लॉबिंग फर्मों की सेवाएं लेता आ रहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अमेरिका में विदेशी दूतावासों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के लिए लॉबिंग फर्म नियुक्त करना एक मानक प्रक्रिया है। इससे संबंधित सभी जानकारियां सार्वजनिक डोमेन में मौजूद हैं और इसमें कुछ भी छिपा हुआ नहीं है।
लॉबिंग फर्म मर्करी पब्लिक अफेयर्स LLC की भूमिका को लेकर मंत्रालय ने कहा कि फर्म ने केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट प्रसारित की थी। यह पोस्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके कार्यकाल के लिए मिली बधाई से जुड़ी थी। मंत्रालय ने साफ किया कि इस फर्म की भूमिका केवल इसी कार्य तक सीमित थी, जिसे भ्रामक रूप में पेश किया जा रहा है।
FARA (फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट) के तहत दाखिल दस्तावेजों में SHW पार्टनर्स LLC का नाम सामने आया था। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस फर्म ने मई और जून 2026 के बीच भारतीय प्रतिनिधियों और व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच आठ फोन कॉल की व्यवस्था की थी। इसमें वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर माइकल नीडम जैसे प्रमुख नाम शामिल थे। ये कॉल अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा से ठीक पहले हुई थीं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत सरकार ने अप्रैल 2025 में SHW पार्टनर्स के साथ अनुबंध किया था, जिसके लिए फर्म को प्रति माह 1.5 लाख डॉलर का भुगतान किया जाता था। हालांकि, जेसन मिलर (जो इस फर्म का नेतृत्व कर रहे थे) के ट्रंप प्रशासन में स्पेशल गवर्नमेंट एम्प्लॉयी के रूप में शामिल होने के बाद, यह समझौता 23 जून को समाप्त कर दिया गया।
विदेश मंत्रालय ने इन सभी तथ्यों को एक सामान्य व्यावसायिक और कूटनीतिक अनुबंध का हिस्सा बताया है। मंत्रालय का तर्क है कि इस तरह के समझौतों को किसी साजिश या अनुचित प्रभाव के रूप में देखना पूरी तरह गलत और आधारहीन है।
This post is misleading. It is a normal practice in the US for Embassies and other entities to hire a lobby firm. Indian Embassy in Washington DC has hired such firms since 1948. These details are available in the public domain. In so far the filing done by Mercury Public Affairs… pic.twitter.com/oTwfarhPl9
— MEA FactCheck (@MEAFactCheck) November 7, 2026
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