दिल्ली के बाजारों में इस बार दिवाली का सीजन राजनीतिक और आर्थिक चर्चाओं का केंद्र रहा। एक तरफ राहुल गांधी की रैलियों और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के कारण व्यापार ठप होने की आशंका जताई जा रही थी, वहीं दूसरी तरफ दिवाली के बाद सामने आए आंकड़ों ने सभी को चौंका दिया है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAT) के अनुसार, दिल्ली में इस बार दिवाली का कारोबार 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है।
आर्थिक आंकड़ों के हिसाब से यह दिवाली व्यापारियों के लिए बेहद फायदेमंद रही। पिछले साल दिल्ली में धनतेरस और दिवाली के दौरान लगभग 80 हजार करोड़ रुपये का व्यापार हुआ था। इस वर्ष इसमें करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे कुल कारोबार 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा न केवल त्योहारी उत्साह को दर्शाता है, बल्कि दिल्ली की अर्थव्यवस्था की मजबूती को भी बयां करता है।
त्योहार से पहले बीजेपी समर्थित व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी की रैलियों और प्रदर्शनों को लेकर कड़ी चिंता जाहिर की थी। CTI का तर्क था कि रैलियों के कारण ट्रैफिक जाम और सुरक्षा प्रतिबंधों से ग्राहकों का बाजारों तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा, जिससे व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने नेताओं से त्योहार के बाद प्रदर्शन करने की अपील भी की थी।
हालांकि, CAT के नवीनतम आंकड़ों ने इस बहस को नया मोड़ दे दिया है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि प्रदर्शनों से कुछ इलाकों में नुकसान हुआ या नहीं, लेकिन शहर का कुल कारोबार निश्चित रूप से पिछले वर्ष के मुकाबले बढ़ा है।
CAT के राष्ट्रीय महामंत्री और सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने दिल्ली की जनता का आभार व्यक्त करते हुए इसे धन्यवाद दिल्ली का नाम दिया है। उन्होंने कहा कि दिल्लीवासियों ने यह साबित कर दिया है कि त्योहारों की खुशियां और व्यापारिक गतिविधियां किसी भी राजनीतिक व्यवधान के आगे नहीं झुकतीं। उन्होंने उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने बाजारों में जाकर खरीदारी की और व्यापारियों का मनोबल बढ़ाया।
इस बार की खरीदारी केवल पारंपरिक वस्तुओं तक सीमित नहीं रही। सोने-चांदी के आभूषणों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, होम डेकोर और कपड़ों के बाजारों में जबरदस्त मांग देखी गई। विशेष रूप से प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत के आह्वान का असर दिखा, जहाँ स्थानीय कारीगरों और हस्तनिर्मित उत्पादों को ग्राहकों ने हाथों-हाथ लिया।
दिवाली के इस 1 लाख करोड़ के कारोबार का प्रभाव दूरगामी है। जब बाजार में बिक्री बढ़ती है, तो उसका सीधा फायदा थोक विक्रेताओं, ट्रांसपोर्टरों, पैकेजिंग उद्योग, लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी सेवाओं से जुड़े लाखों लोगों को मिलता है। रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर छोटे कारीगरों तक, हर वर्ग के लिए यह सीजन आजीविका का सबसे बड़ा साधन साबित हुआ है।
अब दिवाली बीत चुकी है, लेकिन बाजारों में रौनक कम होने के संकेत नहीं हैं। भैया दूज, छठ पूजा और गुरु नानक जयंती तक खरीदारी का यह सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है, जिससे दिल्ली के व्यापारियों को अपनी साल भर की मेहनत का सुखद फल मिलने का सिलसिला जारी रहेगा।
CAT के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने इसे धन्यवाद दिल्ली का नाम दिया है। उनका कहना है कि दिल्ली के लोगों ने यह साबित किया है कि त्योहारों की खुशियां, व्यापारिक गतिविधियां और रोजगार किसी राजनीतिक व्यवधान के कारण रुकने नहीं चाहिए।#PraveenKhandelwalpic.twitter.com/8dgKNNFkN5
— NavBharat Live (@TheNavbharatliv) November 7, 2026
फरीदाबाद: सांड के साथ शर्मनाक हरकत का आरोप, महिला ने चप्पल से पीटा; वीडियो वायरल
दिवाली बोनस का ऐसा अंदाज़ नहीं देखा होगा: सूरत के कारोबारी ने नोटों की थाली सजाकर कर्मचारियों को किया मालामाल
दिवाली पर पीएम मोदी का खास संदेश: इस बार भी सरहद पर वीर जवानों संग मनाएंगे खुशियां
यूपी के किसानों की बल्ले-बल्ले: अब मुफ्त में मिलेंगे सब्जियों के उन्नत बीज, खेती की लागत में होगी भारी कटौती
काली पूजा 2026: जानिए देवी की आराधना का महामुहूर्त और पूजा विधि
शरद पवार अस्पताल से डिस्चार्ज: सिल्वर ओक पहुंचे एनसीपी प्रमुख, उद्धव ठाकरे से होगी अहम मुलाकात
भ्रामक रिपोर्ट : लॉबिंग फर्मों पर विदेश मंत्रालय ने साफ की स्थिति, 1948 से जारी है यह परंपरा
हिटमैन का धमाका: रोहित शर्मा ने तोड़ा शाहिद अफरीदी का महारिकॉर्ड, बने वनडे के सिक्सर किंग
अयोध्या दीपोत्सव: CM योगी का विपक्ष पर तीखा हमला, कहा- रामद्रोहियों को रोशनी अच्छी कैसे लगेगी
दिल्ली के गेस्ट टीचर्स के लिए फीकी दिवाली: 9 साल से वेतन में नहीं हुआ इजाफा, CM से लगाई गुहार