रणबीर कपूर की रामायणम् : वो 5 बड़े कारण जो इस फिल्म को बनाते हैं बाकी सबसे अलग!
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9 साल के लंबे इंतजार और 4000 करोड़ के भारी-भरकम बजट के साथ नमित मल्होत्रा की रामायणम् (पार्ट 1) सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। भगवान श्री राम की गाथा पर अब तक कई शोज और फिल्में बनी हैं, लेकिन नितेश तिवारी निर्देशित यह फिल्म तकनीक और कहानी की गहराई के मामले में एक अलग मानक स्थापित कर रही है।

आइए जानते हैं वो 5 खास बातें, जो इस फिल्म को अब तक बनी रामायण की कहानियों से बिल्कुल अलग और दिलचस्प बनाती हैं।

1. रावण की अनकही जर्नी: असुर से लंकापति तक

अक्सर रावण को सिर्फ बुराई के प्रतीक के रूप में दिखाया गया है, लेकिन रामायणम् में यश द्वारा निभाया गया रावण का किरदार उसके जन्म से शुरू होता है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे असुर कुल में जन्मे रावण को अपनी मां कैकसी के साथ धरती के नीचे रहने पर मजबूर होना पड़ा। उसके तप, ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्ति और तीनों लोकों पर उसके वर्चस्व का विस्तार पहली बार पर्दे पर इतनी बारीकी से उकेरा गया है।

2. विद्युतजीवा और रावण का भीषण संघर्ष

शूर्पणखा के पति विद्युतजीवा का प्रसंग रामायण की वह कहानी है, जिसे पर्दे पर शायद ही पहले कभी जगह मिली हो। फिल्म में विवेक ओबेरॉय ने विद्युतजीवा का किरदार निभाया है। रावण का अपने ही बहनोई यानी विद्युतजीवा के साथ युद्ध और उनके वध की घटना को फिल्म में एक महत्वपूर्ण टर्निंग पॉइंट के रूप में दिखाया गया है, जो शूर्पणखा और रावण के भविष्य के संबंधों को तय करता है।

3. जटायु और दशानन की महा-जंग

जटायु और रावण के बीच का युद्ध इस फिल्म का सबसे आइकॉनिक सीन माना जा रहा है। पारंपरिक कहानियों में हमने जटायु के पंख कटते देखे हैं, लेकिन रामायणम् में जटायु का पराक्रम चौंकाने वाला है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे जटायु ने लड़ाई के दौरान रावण का एक सिर धड़ से अलग कर दिया था। अनुपम खेर की आवाज में जटायु का यह रूप दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहा है।

4. लक्ष्मण का रौद्र अवतार

अक्सर लक्ष्मण को राम के पीछे चलने वाले एक अनुशासित छोटे भाई के रूप में दिखाया गया है। लेकिन रामायणम् में उनके क्रोध और निष्ठा को एक नई गहराई मिली है। जब कैकेयी द्वारा राम को 14 साल के वनवास पर भेजने का प्रसंग आता है, तब लक्ष्मण का रौद्र रूप और उनका आक्रोश फिल्म का एक सबसे पावरफुल सीन बनकर उभरता है, जो उनके चरित्र के उस पहलू को दिखाता है जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता था।

5. सीता का योद्धा स्वरूप

अब तक माता सीता को केवल कोमल और सहनशील रूप में दिखाया गया है। रामायणम् इस धारणा को तोड़ती है। फिल्म में साई पल्लवी द्वारा अभिनीत सीता का वह रूप दिखाया गया है जो युद्ध कौशल में भी निपुण है। वाल्मीकि और तुलसीदास की रचनाओं से प्रेरित इस फिल्म में सीता का यह योद्धा व्यक्तित्व दर्शकों के लिए एक बड़ा सरप्राइज है, जो उन्हें एक नई प्रेरणा देता है।

नितेश तिवारी की यह फिल्म सिर्फ एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास के पन्नों को एक आधुनिक और भव्य दृष्टिकोण देने का साहसी प्रयास है। यदि आपने अभी तक इसे नहीं देखा है, तो यह सिनेमाई अनुभव निश्चित रूप से आपको हैरान कर देगा।

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