PPSC भर्ती महाघोटाला: क्या योग्य युवाओं के हक पर डाका डाल रही है मान सरकार?
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पंजाब में PCS मुख्य परीक्षा के परिणाम ने सूबे की सियासत में भूचाल ला दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी और सांसद तरुण चुघ ने इन परिणामों को भर्ती घोटाला करार देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चुघ ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर पूरे मामले की CBI जांच की मांग की है।

परिणामों में दिख रही सेटिंग के सबूत?

विवाद का मुख्य कारण परीक्षा परिणाम की विसंगतियां हैं। आरोप है कि जिन अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी ही नहीं, उनके रोल नंबर भी सफल उम्मीदवारों की सूची में शामिल हैं। वहीं, एक ही परीक्षा केंद्र से 24.21% अभ्यर्थियों का चयन और लगातार रोल नंबरों के समूहों का शॉर्टलिस्ट होना चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करता है।

युवाओं के सपनों का सिस्टमेटिक कत्ल

तरुण चुघ ने कहा कि जिस सरकार ने बिना सिफारिश नौकरी देने का वादा किया था, उसी के कार्यकाल में मेरिट को दरकिनार किया जा रहा है। नायब तहसीलदार से लेकर फार्मेसी ऑफिसर भर्ती तक, लगभग हर बड़ी परीक्षा किसी न किसी विवाद या नकल गिरोह के साये में रही है। चुघ का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि पंजाब के युवाओं के भविष्य के साथ किया गया एक क्रूर मजाक है।

क्या CM भगवंत मान लेंगे नैतिक जिम्मेदारी?

भाजपा नेता ने सीधे शब्दों में कहा कि विपक्ष में रहने के दौरान परीक्षाओं में गड़बड़ी पर इस्तीफा मांगने वाले भगवंत मान आज खुद चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि बार-बार उठ रहे भर्ती घोटालों के बावजूद अब तक किसी बड़े पदाधिकारी ने जवाबदेही क्यों नहीं तय की। क्या मुख्यमंत्री का काम केवल खुद को ईमानदार घोषित करना रह गया है?

CBI जांच और इंटरव्यू रोकने की मांग

तरुण चुघ ने राज्यपाल से मांग की है कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच पूरी न हो, तब तक साक्षात्कार (इंटरव्यू) प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही, परीक्षा से संबंधित सभी उत्तर पुस्तिकाओं, उपस्थिति रजिस्टर और CCTV फुटेज को सुरक्षित करने का निर्देश दिया जाए।

जुमले नहीं, न्याय चाहिए

भाजपा ने साफ कर दिया है कि वे इस लड़ाई को सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ेंगे। चुघ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि पंजाब के युवाओं का उनकी सरकार से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। अब राज्य को खोखले दावों की नहीं, बल्कि पारदर्शी जांच और दोषियों को जेल भेजने वाले न्याय की जरूरत है।

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