कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। भाजपा ने संगठन और उसके शीर्ष नेतृत्व पर भारत में अशांति फैलाने और विदेशी ताकतों से अवैध फंडिंग लेने के गंभीर आरोप लगाए हैं। बेंगलुरु में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि उनके पास इन आरोपों के पुख्ता सबूत मौजूद हैं।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि CJP को अनधिकृत स्रोतों और भारत विरोधी एनजीओ (NGOs) से पैसा मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके को अमेरिका से फंडिंग मिल रही है, जबकि रणनीतिकार आशुतोष रांका को पाकिस्तानी राजनेताओं से आर्थिक मदद प्राप्त हो रही है। उनके अनुसार, डीप स्टेट और भारत विरोधी ताकतें मिलकर देश के खिलाफ नैरेटिव तैयार कर रही हैं।
भाजपा प्रवक्ता तुहिन ए. सिन्हा ने आरोप लगाया कि CJP का एकमात्र लक्ष्य त्योहारों के सीजन में दिल्ली में अफरा-तफरी का माहौल बनाना था। सिन्हा ने इसे सीधे तौर पर विद्रोह भड़काने की रणनीति करार दिया है। भाजपा का कहना है कि इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे के इरादे पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण थे, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी की कानून-व्यवस्था को बिगाड़ना था।
सिन्हा ने CJP की तुलना कांग्रेस से करते हुए गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों संगठन सुनियोजित तरीके से न्यायपालिका को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च का उदाहरण देते हुए कहा कि महत्वपूर्ण अदालती सुनवाई से पहले मॉक इंपीचमेंट (नकली महाभियोग) जैसा प्रपंच करना लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की एक वैश्विक साजिश है।
विवाद के बीच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने CJP प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका को पूछताछ के लिए तलब किया है। मामला 10 अक्टूबर को शांति भंग करने से जुड़ा है। उस समय दोनों को 50-50 हजार रुपये के पीस बॉन्ड पर रिहा किया गया था, लेकिन आरोप है कि 13 अक्टूबर को ही उन्होंने मुचलके की शर्तों का उल्लंघन कर जंतर-मंतर पर अवैध रूप से प्रवेश किया और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।
CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने मई में अमेरिका में रहते हुए इस संगठन की वेबसाइट और सोशल मीडिया हैंडल लॉन्च किए थे। बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़े दिपके का इतिहास भी चर्चाओं में है; बताया जा रहा है कि वह 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया टीम का हिस्सा रहे थे।
भाजपा के इन आरोपों पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने सरकार को चुनौती देते हुए पूछा कि यदि फंडिंग के सबूत हैं, तो सरकार अब तक चुप क्यों है? उन्होंने अमित शाह और जांच एजेंसियों पर सवाल खड़े करते हुए इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा बताया है।
#WATCH | Bengaluru | Union Minister Dr Jitendra Singh says, There is enough evidence to show that they are being funded by unauthorised sources, by anti-India NGOs, and anti-India organisations within and outside the country. The foreign-funded NGOs, deep state operatives and… pic.twitter.com/ind8tyOptb
— ANI (@ANI) November 4, 2026
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