पूर्व CJI वाईके सभरवाल के बेटों के लिए बढ़ी मुश्किलें, सुप्रीम कोर्ट ने आयकर जांच को दी हरी झंडी
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भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) वाईके सभरवाल के बेटों, चेतन सभरवाल और नितिन सभरवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में एक प्रमुख संपत्ति की खरीद से जुड़े शेयर लेनदेन की आयकर जांच का रास्ता साफ कर दिया है। कोर्ट ने दोनों भाइयों की ओर से दायर चार अपीलों को खारिज कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला साल 2010 में दिल्ली के सिकंदरा रोड पर खरीदी गई एक प्राइम प्रॉपर्टी से जुड़ा है। आयकर विभाग को संदेह था कि इस संपत्ति को खरीदने में इस्तेमाल किया गया पैसा उन दो कंपनियों के शेयरों की बिक्री से आया था, जिन्हें अत्यधिक उच्च मूल्यांकन पर बेचा गया था। विभाग का मानना है कि शेयरों की बिक्री में दिखाई गई कीमत और वास्तविक कीमत के बीच बड़ा अंतर है।

2007 का शेयर सौदा और संदेह

अक्टूबर 2007 में सभरवाल बंधुओं ने पवन इम्पेक्स और एसवीआईआईटी सॉफ्टवेयर के शेयर जीवाईएस रियल एस्टेट को बेचे थे। यह सौदा क्रमशः 195 करोड़ और 60 करोड़ रुपये में तय हुआ था। जांच में पाया गया कि शेयरों की बिक्री से मिली रकम का बड़ा हिस्सा अप्रैल 2010 में सिकंदरा रोड की प्रॉपर्टी खरीदने में लगाया गया था। आयकर विभाग ने इसे कर चोरी की संभावना मानते हुए दोबारा असेसमेंट (री-असेसमेंट) शुरू किया था।

रीजन टू बिलीव पर क्या कहा कोर्ट ने?

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने स्पष्ट किया कि रीजन टू बिलीव (मानने का कारण) का अर्थ यह नहीं है कि अधिकारी पहले ही साबित कर दे कि टैक्स चोरी हुई है। कोर्ट ने कहा कि आयकर अधिकारी के पास जांच रिपोर्ट के रूप में ठोस सामग्री मौजूद थी, जो यह दर्शाती है कि टैक्स योग्य आय का आकलन छूटने की आशंका है।

ठोस साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि आयकर विभाग की यह कार्रवाई केवल किसी अस्पष्ट आशंका पर नहीं, बल्कि डायरेक्टर जनरल की जांच रिपोर्ट जैसे ठोस आधारों पर आधारित है। अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि इस स्तर पर न्यायिक अदालतें इस बात की समीक्षा नहीं कर सकतीं कि अधिकारी के पास मौजूद कारण पर्याप्त हैं या नहीं।

न्यायिक करियर की पृष्ठभूमि

वाईके सभरवाल भारत के 36वें मुख्य न्यायाधीश थे। उन्होंने 1 नवंबर 2005 से 14 जनवरी 2007 तक देश के सर्वोच्च न्यायिक पद का दायित्व संभाला था। लंबे समय से चल रहा यह कानूनी विवाद अब आयकर विभाग के लिए एक बार फिर से जांच के दरवाजे खोलता है, जिससे आने वाले समय में सभरवाल बंधुओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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