वोट चोरी पर पात्रा का पलटवार: नेहरू ने सरदार पटेल के हक के वोट चुराकर खुद प्रधानमंत्री पद हथियाया
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नई दिल्ली: कांग्रेस और इंडिया गठबंधन द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चलाए जा रहे जन-महाभियोग कार्यक्रम पर बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने तीखा हमला बोला है। पात्रा ने इस आयोजन को नकली संसद करार देते हुए कांग्रेस के चुनावी इतिहास पर सवाल खड़े किए हैं।

वोट चोरी की शुरुआत नेहरू ने की संबित पात्रा ने वोट चोरी के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर भारत में वोट चोरी की शुरुआत किसी ने की थी, तो वह पंडित जवाहरलाल नेहरू थे। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू ने कांग्रेस के उन वरिष्ठ नेताओं के वोटों को चुराया था, जो सरदार वल्लभभाई पटेल को प्रधानमंत्री बनाने के पक्ष में थे। पात्रा के अनुसार, नेहरू ने उन्हीं चुराए हुए वोटों के दम पर बिना जनता के वास्तविक जनादेश के प्रधानमंत्री की कुर्सी हासिल की थी।

नकली संसद से असल संसद का अपमान पात्रा ने इंडिया गठबंधन के जन-महाभियोग कार्यक्रम को नकली संसद बताते हुए कहा कि विपक्षी दल ऐसे आयोजन कर देश की संवैधानिक संस्थाओं का मजाक उड़ा रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि बार-बार झूठ बोलने से वह सच नहीं हो जाता। उन्होंने चुनाव आयोग के सर्वसम्मत फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में भी आयोग यह स्पष्ट कर चुका है कि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी है।

क्या है SIR और 13 करोड़ का सच? मतदाता सूची से नाम कटने के विवाद पर पात्रा ने ASDD श्रेणी का विस्तार से अर्थ समझाया। उन्होंने बताया:

पात्रा ने दावा किया कि देश में अब तक 12 बार SIR (Special Summary Revision) प्रक्रिया हुई है, जिनमें से 10 बार कांग्रेस शासनकाल में ही हुई थी। उन्होंने बताया कि अब तक 2.8 करोड़ मृत लोगों के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि TMC सरकार मृत लोगों के नाम पर फर्जी मतदान कराती रही है, जिस पर अब लगाम लगी है।

घुसपैठियों पर बीजेपी का कड़ा रुख पात्रा ने खरगे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वोट देना केवल भारतीय नागरिकों का अधिकार है, घुसपैठियों का नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं हुआ है, केवल एक घोषणा पत्र जोड़ा गया है। उन्होंने दावा किया कि जो मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं, वे फॉर्म 6 भरकर अपना नाम जुड़वा सकते हैं। पात्रा ने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर फॉर्म नहीं भर रहे हैं, क्योंकि उनमें घुसपैठिए भी शामिल हैं जो अपनी पहचान उजागर होने से डर रहे हैं।

अंत में पात्रा ने विपक्षी नेताओं को सलाह दी कि वे आधारहीन आरोप लगाने के बजाय संवैधानिक प्रक्रियाओं को समझने का प्रयास करें। उन्होंने दोहराया कि फर्जी मतदान की गुंजाइश खत्म होने से ही कांग्रेस और उसके सहयोगी दल तिलमिलाए हुए हैं।

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