रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की मेगा रैली: राहुल गांधी के मार्च पर पुलिस का बड़ा बयान
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दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को इंडिया गठबंधन की बड़ी रैली आयोजित होने जा रही है। यह रैली चुनाव आयोग (CEC) के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बुलाई गई है। विपक्ष इसे लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण आंदोलन मान रहा है।

राहुल गांधी का मार्च प्लान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर इस रैली से पहले एक पैदल मार्च का ऐलान किया है। उन्होंने कल मिलते हैं, साथ चलते हैं का नारा देते हुए बताया कि यह मार्च रविवार दोपहर 12 बजे कनॉट प्लेस के मिंटो रोड जंक्शन से शुरू होकर अजमेरी गेट होते हुए रामलीला मैदान तक जाएगा।

पुलिस ने कहा- अनुमति नहीं मांगी गई दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी के मार्च को लेकर सख्त रुख अपनाया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक नेता अपनी निजी गाड़ियों में जाने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन बिना परमिशन के मार्च निकालना नियमों का उल्लंघन हो सकता है।

धारा 163 और सुरक्षा के कड़े इंतजाम नई दिल्ली इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है, जो लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगाती है। इसी कारण जंतर-मंतर पर भी विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। बावजूद इसके, रामलीला मैदान में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जहां दिल्ली पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाएगी।

CEC के खिलाफ विरोध का मोर्चा उधर, चुनाव आयोग के खिलाफ इंडिया गठबंधन की रणनीति तेज हो गई है। शनिवार दोपहर 3:30 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर एक सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किया गया है। यह कार्यक्रम शुक्रवार को भारी बारिश के कारण टाल दिया गया था।

कांग्रेस का आरोप: हमें रोकने की साजिश राहुल गांधी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गृह मंत्री लोगों को दिल्ली आने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों से आने वाले आम लोगों और कार्यकर्ताओं को रास्ते में रोका जा रहा है।

लोकतंत्र की रक्षा का दावा राहुल गांधी ने इस मार्च में राजनीतिक दलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और आम नागरिकों को शामिल होने का खुला निमंत्रण दिया है। कांग्रेस का कहना है कि यह लड़ाई नरेंद्र मोदी, अमित शाह और चुनाव आयोग द्वारा कथित तौर पर लोकतंत्र को नष्ट करने के प्रयासों के खिलाफ है।

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