हिंदुओं की आस्था और डॉक्टरों का अपमान: इजरायली रब्बी योसी मिजराही अपने विवादित बोलों से घिरे
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नई दिल्ली। इजरायली-अमेरिकी यहूदी धर्मगुरु रब्बी योसी मिजराही एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे हिंदू धर्म की मान्यताओं, विशेषकर गौ पूजा और भारतीय चिकित्सकों के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं। इस बयान के बाद भारत और इजरायल दोनों देशों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

गौ पूजा का उपहास और धार्मिक असहिष्णुता 28 अक्टूबर 2026 को प्रसारित अपने एक प्रवचन में मिजराही ने हिंदुओं द्वारा गाय को दिए जाने वाले सम्मान का मजाक उड़ाया। हिंदू धर्म में गाय को माता मानकर पूजा करने की परंपरा को उन्होंने बेतुके दावों के साथ निशाना बनाया। आलोचकों का कहना है कि किसी एक धर्म की मान्यताओं का सार्वजनिक मंच से उपहास उड़ाना न केवल असंवेदनशील है, बल्कि यह धार्मिक असहिष्णुता को भी बढ़ावा देता है।

भारतीय चिकित्सकों की योग्यता पर उठाए सवाल मिजराही का विवाद केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने नई दिल्ली के डॉक्टरों को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने एक काल्पनिक उदाहरण देते हुए भारतीय चिकित्सा जगत की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया। सोशल मीडिया पर उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि क्या किसी धर्म को मानने से किसी डॉक्टर की पेशेवर क्षमता या योग्यता कम हो जाती है। यह बयान भारतीय चिकित्सा समुदाय के प्रति उनके पूर्वाग्रह को दर्शाता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा छेड़ दी है। इजरायली शोधकर्ता येशाया रोजेनमैन ने भी रब्बी के बयानों को इजरायल की छवि के लिए हानिकारक बताया है। साथ ही कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इसे आपसी सम्मान के खिलाफ करार दिया है। हालांकि, मिजराही का यह बयान उनका व्यक्तिगत विचार है, जिसे इजरायल सरकार या यहूदी समुदाय का आधिकारिक रुख नहीं माना जा सकता।

विवादों से पुराना नाता यह पहली बार नहीं है जब योसी मिजराही विवादों में आए हैं। इससे पहले भी वे ऑटिज्म और डाउन सिंड्रोम जैसी संवेदनशील स्थितियों पर अपमानजनक टिप्पणी कर चुके हैं। 2016 में, 16 प्रमुख यहूदी रब्बियों ने उनके प्रचार के तरीकों और बयानों की कड़ी निंदा की थी। उनके बयानों को अक्सर उनके अपने समुदाय के भीतर भी अनुचित माना जाता रहा है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम जिम्मेदारी यह प्रकरण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और दूसरों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने के बीच की महीन रेखा को फिर से रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रभावशाली धर्मगुरुओं को सार्वजनिक मंचों पर अधिक जिम्मेदारी से बात करनी चाहिए, क्योंकि उनके शब्दों का प्रभाव सीमाओं के पार जाकर दो संस्कृतियों के बीच तनाव पैदा कर सकता है। फिलहाल, इस मामले पर मिजराही की ओर से कोई सफाई नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आक्रोश जारी है।

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