अक्टूबर का महीना खत्म होते-होते भारत का मौसम पूरी तरह बदल चुका है। जहां पहाड़ों पर बर्फबारी की शुरुआत हो चुकी है, वहीं मैदानी इलाकों और तटों पर कुदरत का ‘रौद्र रूप’ देखने को मिल रहा है। चक्रवात ‘अर्नब’ के अवशेष और जलवायु परिवर्तन के कारण अब भारत में ‘सर्दियों में बाढ़’ जैसी नई और डरावनी स्थिति पैदा हो गई है।
चक्रवात ‘अर्नब’ ने ओडिशा में भारी तबाही मचाई है। 30 अक्टूबर की सुबह तक राज्य के गंजाम, गजपति और कंधमाल जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। अकेले गंजाम में 300 गांवों में पानी भर चुका है और 70 गांव पूरी तरह कट चुके हैं। रुशिकुल्या और वंशधारा नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। अब तक करीब 60 हजार लोगों को रेस्क्यू किया गया है, जिसमें 3,000 गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। बचाव कार्यों के लिए एनडीआरएफ (NDRF) की 313 टीमें तैनात की गई हैं, लेकिन खराब मौसम रेस्क्यू में बाधा बन रहा है। राज्य में ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं और नेशनल हाईवे भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
चक्रवात का पहला वार झेलने वाले आंध्र प्रदेश में भारी नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के अनुसार, राज्य को करीब 4,600 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जिसमें अकेले बिजली विभाग को 500 करोड़ की चपत लगी है। बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है और कई ग्रामीण इलाकों में संपर्क अभी भी टूटा हुआ है।
ओडिशा के बाद अब बिहार और उत्तर प्रदेश पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। मौसम विभाग ने बिहार के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। अत्यधिक भारी बारिश के कारण उत्तर बिहार में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए ऑरेंज अलर्ट है और पश्चिमी हिस्सों में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।
उत्तर-पूर्वी राज्यों में एक नया खतरा उभर कर आया है। भूटान में सिंताफु ग्लेशियर झील फटने से संकोश नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया है। यह नदी पश्चिम बंगाल और असम से होकर गुजरती है, जिसके चलते अलीपुरद्वार और कूचबिहार में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
एक तरफ बाढ़ है, तो दूसरी तरफ उत्तर भारत में ठंड ने दस्तक दे दी है। दिल्ली-एनसीआर में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि हुई है। बीते गुरुवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे गिर गया, जो पिछले चार सालों का सबसे ठंडा अक्टूबर दिन रहा। उत्तराखंड में भारी बर्फबारी और पंजाब-हरियाणा में ओलों का अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह सिर्फ एक सामान्य चक्रवाती घटना नहीं है। मानसून के बाद भी चक्रवातों का आना और सर्दियों के करीब बाढ़ की स्थिति बनना जलवायु परिवर्तन का सीधा संकेत है। अंडमान निकोबार के पास एक और लो-प्रेशर एरिया बन रहा है, जो अगले कुछ दिनों में फिर से किसी चक्रवात को जन्म दे सकता है। यह स्पष्ट संकेत है कि देश को मौसम की इस ‘नई और घातक आदत’ के लिए अब लंबे समय तक तैयार रहना होगा।
*⚠️ IMD WEATHER WARNING | 🌧️
— India Meteorological Department (@Indiametdept) October 29, 2026
Under the influence of the Depression (remnant of Cyclone “Arnab”) over south Chhattisgarh and adjoining south Odisha, isolated extremely heavy rainfall is very likely over:
29 October 2026: East Chhattisgarh and adjoining North Odisha
30 October… pic.twitter.com/bOXVJcRQmN
अल्लू अर्जुन का मेगा प्लान : पुष्पा 3 समेत इन 6 फिल्मों से सिनेमाघरों में मचेगा तहलका!
IND vs NZ: ऑकलैंड में क्लीन स्वीप की तैयारी, जानें चौथे टी20 का पूरा लेखा-जोखा
बुलंदशहर में सोता हुआ घर बना काल: मलबे में दबकर चाचा-भतीजे की दर्दनाक मौत
अरनब तूफान ने मचाई तबाही: आंध्र प्रदेश को 4,600 करोड़ का नुकसान, CM नायडू ने केंद्र से मांगी मदद
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बोले अनंत सिंह: 1 दिसंबर को करेंगे सरेंडर, नीरज कुमार पर लगाए गंभीर आरोप
दिल्ली-NCR में मौसम का यू-टर्न: झमाझम बारिश और बर्फीली हवाओं ने बढ़ाई ठिठुरन
अभिषेक शर्मा का विस्फोटक वार: आज के मैच में है दो बड़े रिकॉर्ड्स पर कब्जा जमाने का मौका
न्यूजीलैंड में किंग कोहली का जलवा: ऑकलैंड एयरपोर्ट पर फैंस की भारी भीड़, वीडियो वायरल
ठीक हो जाओ, फिर सिखाऊंगा लड़ना कैसे है... : UAE के राष्ट्रपति ने घायल भारतीय पायलट को गले लगाकर जीता दिल
जेडीयू के पोस्टर से ललन सिंह गायब: क्या अनंत सिंह के बाद अब पार्टी में साइडलाइन होने की बारी?