दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर चल रहा लंबा और तनावपूर्ण आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया है। प्रशासन द्वारा चुनाव के लिए लिखित समयसीमा जारी करने के बाद भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने अपना अनशन तोड़ दिया है। 2006 के बाद से थमी हुई छात्र राजनीति के लिए यह एक ऐतिहासिक मोड़ है।
अगस्त 2027 में वोट डालेंगे छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अगस्त 2027 के अंतिम सप्ताह में छात्रसंघ चुनाव कराए जाएंगे। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए प्रशासन ने एक ठोस रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत 15 मई 2027 तक छात्रसंघ के संविधान का मसौदा तैयार करने, उसे मंजूरी देने और अनिवार्य रूप से लागू करने की समयसीमा निर्धारित की गई है। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत 16 जुलाई 2027 को होगी, जिसके छह सप्ताह के भीतर चुनाव कराने का लक्ष्य रखा गया है।
लिखित आश्वासन पर बनी सहमति प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रशासन से केवल मौखिक नहीं, बल्कि लिखित आदेश की मांग की थी। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रोफेसर मोहम्मद महताब आलम रिजवी के साथ मुलाकात और लिखित आश्वासन मिलने के बाद छात्रों ने आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया। छात्रों का मानना है कि दो दशकों की अनिश्चितता के बाद अब उनके पास चुनाव प्रक्रिया का एक स्पष्ट रोडमैप है।
अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी वापस आंदोलन के दौरान प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को भी प्रशासन ने निरस्त कर दिया है। इसमें छात्रों को मिले कारण बताओ नोटिस, निलंबन, निष्कासन और कैंपस में प्रवेश पर लगी रोक जैसे आदेश शामिल हैं। प्रशासन के इस निर्णय से उन छात्रों को बड़ी राहत मिली है, जो आंदोलन के दौरान कठोर प्रशासनिक कार्रवाई का सामना कर रहे थे।
9 नवंबर से कैंपस में लौटेंगी ऑफलाइन कक्षाएं छात्रसंघ आंदोलन के चलते यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक माहौल भी काफी प्रभावित हुआ था। फिलहाल, दिवाली की छुट्टियों के बाद 9 नवंबर से जामिया में ऑफलाइन कक्षाएं और परीक्षाएं फिर से सुचारू रूप से शुरू हो जाएंगी। ऑनलाइन शिक्षण मोड से हटकर ऑफलाइन मोड पर आने से उन छात्रों को सबसे अधिक लाभ होगा, जिनके कोर्स में प्रैक्टिकल और फील्डवर्क जैसे अनिवार्य कार्य शामिल हैं।
लोकतंत्र की बहाली की चुनौती पिछले 21 वर्षों से जामिया में छात्र प्रतिनिधियों का कोई निर्वाचित मंच नहीं था। छात्र बिना चुने हुए प्रतिनिधियों के अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाने को मजबूर थे। अब जबकि चुनाव की तारीखों का खाका सामने है, असली चुनौती 15 मई 2027 तक संविधान निर्माण की प्रक्रिया को समय पर पूरा करने की है। क्या प्रशासन इस बार अपने वादे पर कायम रहता है? यह देखने के लिए अब पूरी यूनिवर्सिटी की नजरें आने वाले महीनों पर टिकी हैं।
Jamia Millia Islamia University issues order accepting all three demands of the protesting students. The students protest and hunger strike has hence been called off.
— ANI (@ANI) October 29, 2026
1. The approval and implementation of the Jamia Millia Islamia Students Union Constitution shall be completed… https://t.co/CFwEjX3Ryg pic.twitter.com/Ejqds8aynm
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