मिडिल ईस्ट युद्ध की आग में झुलसा भारत: 14 नाविकों समेत 22 भारतीयों की मौत
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मिडिल ईस्ट में छिड़े भीषण युद्ध ने भारत को गहरा जख्म दिया है। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इस संघर्ष में अब तक 22 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है, जिनमें से 14 जांबाज भारतीय नाविक शामिल हैं। यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और समुद्र में काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

युद्ध की शुरुआत और बढ़ता तनाव 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद स्थिति बेकाबू हो गई। इन हमलों में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए। इसके साथ ही, व्यापारिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिए गए, जिससे समुद्री क्षेत्र रणभूमि में तब्दील हो गया।

मार्च से शुरू हुआ मौतों का सिलसिला समुद्री हमलों में भारतीयों के हताहत होने का दौर 1 मार्च से शुरू हुआ, जब मार्शल आइलैंड्स के टैंकर एमकेडी वोम पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की जान गई। उसी दिन ओमान के तट के पास स्काईलाइट टैंकर पर हुए हमले में दो और भारतीय नाविकों ने दम तोड़ दिया।

जून और जुलाई में बढ़ीं मुश्किलें जून के महीने में ओमान के पास एमटी सेटेबेलो पर हुए अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों (आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पटनाला सुरेश) की मौत हो गई। जुलाई में स्थिति और बिगड़ी, जब मोंबासा और अल बहिया टैंकरों पर ईरानी मिसाइल हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हुई और छह अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के बाद भारत ने ईरान के उप मिशन प्रमुख को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया था।

लापता नाविकों की तलाश जारी हमलों का शिकार केवल वही जहाज नहीं हुए जो डूब गए, बल्कि कई ऐसे जहाज भी थे जिन पर सवार भारतीय चालक दल के सदस्य लापता हो गए। जीएफएस गैलेक्सी और एमटी एल गैया जैसे जहाजों पर हुए हमलों के दौरान कई भारतीय नागरिकों को बचाया गया, लेकिन कुछ अभी भी लापता हैं जिनकी तलाश के प्रयास जारी हैं।

भारत की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम विदेश मंत्रालय और जहाजरानी महानिदेशालय (DG Shipping) लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। भारतीय मिशनों और शिपिंग कंपनियों के साथ समन्वय कर प्रभावित परिवारों को सहायता पहुंचाई जा रही है। 28 फरवरी को ही सुरक्षा परामर्श जारी कर नाविकों को फारस की खाड़ी और होर्मुज के आसपास अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई थी। सरकार ने नाविकों की मदद के लिए 24 घंटे काम करने वाले कंट्रोल रूम भी स्थापित किए हैं।

इजराइल के साथ मजबूत होंगे संबंध इन तमाम चुनौतियों के बीच, भारत ने साफ किया है कि वह इजराइल के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि रक्षा, व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में दोनों देशों का आपसी सहयोग आने वाले समय में और अधिक प्रगाढ़ होगा। भारत इजराइल की राजनीतिक परिस्थितियों पर बारीकी से नजर बनाए हुए है।

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