बीजापुर का पीडिया : नक्सलवाद के अंधेरे को चीरकर पहली बार बिजली की रोशनी से जगमगाया गांव
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छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले का पीडिया गांव अब अपनी पुरानी पहचान को पीछे छोड़कर विकास की नई इबारत लिख रहा है। कभी नक्सलियों के अभेद्य गढ़ और कोर इलाके के रूप में कुख्यात रहा यह गांव दशकों के अंधेरे के बाद पहली बार बिजली की रोशनी से जगमगा उठा है।

अंधेरे से आजादी: बिजली पहुंची घर-घर आजादी के बाद से ही पीडिया के ग्रामीण चिमनी और लालटेन के सहारे जीवन जीने को मजबूर थे। अब घरों के भीतर बिजली पहुंचते ही ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। यह बिजली सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जिसने उनके जीवन स्तर को सुधारने का मार्ग प्रशस्त किया है।

1980 से नक्सली चंगुल में था क्षेत्र इतिहास गवाह है कि 1980 के दशक से यह पूरा क्षेत्र नक्सलियों के प्रभाव में था। चार पंचायतों वाला यह इलाका इतना संवेदनशील था कि प्रशासनिक पहुंच न के बराबर थी। दुर्गम भूगोल और नक्सली दहशत के कारण यहां विकास कार्यों की कल्पना करना भी चुनौतीपूर्ण था। सुरक्षा बलों के लिए भी यह एक कठिन चुनौती थी।

सुरक्षा कैंपों ने बदला समीकरण पीडिया की तस्वीर बदलने में सुरक्षा बलों की अहम भूमिका रही है। बीजापुर से कोपागुडेम तक सीआरपीएफ के 11 कैंप स्थापित होने के बाद इलाके की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई। सुरक्षा का घेरा सख्त होते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ और विकास की योजनाओं ने गति पकड़ी। अब बुनियादी ढांचा आम लोगों तक पहुंच रहा है।

70 किलोमीटर की पैदल यात्रा का झंझट खत्म बिजली के साथ-साथ बस सेवा की शुरुआत ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। पहले स्वास्थ्य सेवाओं या बाजार के लिए जिला मुख्यालय जाने हेतु ग्रामीणों को लगभग 70 किलोमीटर की लंबी और जोखिम भरी पैदल यात्रा करनी पड़ती थी। अब बस सेवा ने लोगों की दूरी और मेहनत दोनों को कम कर दिया है, जिससे वे मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

विकास की दिशा में पहला कदम पीडिया की चार पंचायतों में सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार तेजी से किया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य इन सुदूर क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा में लाना है। बिजली और बस सेवा की शुरुआत केवल एक शुरुआत है; अब शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर पैदा करना सरकार के लिए अगली बड़ी प्राथमिकता है।

पीडिया का यह बदलाव यह साबित करता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सुरक्षा के साये में विकास के रास्ते दुर्गम इलाकों तक भी पहुंच सकते हैं। ग्रामीण अब एक बेहतर और उज्जवल भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

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