गाजीपुर का सियासी पारा 2027 के विधानसभा चुनाव के करीब आते ही उफान पर है। साल 2022 के चुनाव में इस जिले ने पूरे पूर्वांचल को चौंका दिया था, जब भाजपा लहर के बावजूद जिले की सातों सीटों पर विपक्षी गठबंधन ने भगवा खेमे का सूपड़ा साफ कर दिया था। लेकिन आगामी चुनाव में स्थितियां 2022 जैसी नहीं रहने वाली हैं।
बदलते गठबंधन का नया खेल 2022 में समाजवादी पार्टी (सपा) की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे सुभासपा (सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी) का साथ एक बड़ा कारक था। अब पासा पलट चुका है। सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर अब भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) का हिस्सा हैं और योगी सरकार में मंत्री भी हैं। राजभर ने ऐलान कर दिया है कि वे जहूराबाद से फिर ताल ठोकेंगे और एनडीए सभी सात सीटों पर कब्जा करेगा।
सातों सीटों का चुनावी भूगोल गाजीपुर में कुल 7 विधानसभा सीटें हैं: जखनिया, सैदपुर, गाजीपुर सदर, जंगीपुर, जहूराबाद, मोहम्मदाबाद और जमानिया। इनमें से जखनिया और सैदपुर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। 2022 के नतीजों पर नजर डालें तो सपा ने 5 और सुभासपा ने 2 सीटें जीती थीं।
जातीय समीकरण और चुनौतियां जिले में करीब 89% हिंदू और 10% मुस्लिम आबादी है। यहां की हर सीट पर अलग जातीय समीकरण है। जहां मोहम्मदाबाद में भूमिहार मतदाता निर्णायक हैं, वहीं जखनिया और सैदपुर में दलित, यादव और राजभर वोट बैंक जीत-हार तय करते हैं।
सपा का मनोबल लोकसभा चुनाव 2024 में अफजाल अंसारी की जीत के बाद काफी बढ़ा हुआ है। वहीं, भाजपा-सुभासपा गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीटों का बंटवारा है। 2022 में जो सीटें भाजपा हार गई थी, वहां अब सुभासपा के साथ तालमेल बिठाना एनडीए के लिए एक कठिन परीक्षा होगी।
क्या है भावी तस्वीर? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 में गाजीपुर का मुकाबला सीधे तौर पर सपा और एनडीए के बीच वर्चस्व की जंग बन गया है। एक तरफ अखिलेश यादव का पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कार्ड है, तो दूसरी तरफ ओमप्रकाश राजभर की नई सियासी चालें। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा अपना खोया हुआ किला वापस जीत पाएगी या गाजीपुर में सपा का जादू फिर चलेगा।
*ग्राम धरसौना, जनपद वाराणसी में श्री छेदी यादव जी के आवास पर क्षेत्र के सभ्रान्त एवं प्रबुद्धजनों से आत्मीय मुलाकात कर विभिन्न विषयों पर संवाद किया। pic.twitter.com/GZOFe4HQhK
— Om Prakash Rajbhar (@oprajbhar) October 26, 2026
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