ऑनलाइन शराब बुकिंग पर घमासान: DSIIDC ने AAP को दिया करारा जवाब, कहा - आपकी सरकार ने ही दी थी मंजूरी
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दिल्ली में ऑनलाइन शराब बुकिंग ऐप को लेकर जारी विवाद के बीच दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (DSIIDC) ने चुप्पी तोड़ी है। निगम ने स्पष्ट किया है कि इस ऐप को लाने की योजना और मंजूरी पिछली सरकार के कार्यकाल (2024) में ही दी गई थी।

क्यों शुरू किया गया ऐप? DSIIDC के अधिकारियों के अनुसार, इस ऐप का मुख्य उद्देश्य शराब की खुदरा बिक्री में पारदर्शिता लाना और चुनिंदा ब्रांडों को जबरन बढ़ावा दिए जाने (ब्रांड पुशिंग) की प्रथा को रोकना था। निगम ने नवंबर 2025 में दिल्ली लिकर बुकिंग ऐप लॉन्च किया था, जिसके लिए वर्क ऑर्डर जनवरी 2025 में ही जारी कर दिए गए थे।

कैसे काम करती है यह सुविधा? इस डिजिटल सुविधा के जरिए ग्राहक घर बैठे दिल्ली भर में मौजूद DSIIDC की करीब 210 दुकानों पर उपलब्ध स्टॉक देख सकते हैं। ग्राहक अपने पसंदीदा ब्रांड को ऐप पर रिजर्व कर सकते हैं और ऑनलाइन भुगतान के बाद दुकान से शराब प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, अधिकारियों ने माना कि अभी भी बहुत से लोगों को इस सुविधा की जानकारी नहीं है, जिसके कारण इसका रिस्पॉन्स उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है।

AAP और विपक्ष का तीखा विरोध इस योजना के सामने आते ही आम आदमी पार्टी (AAP) ने भाजपा सरकार पर हमला बोल दिया है। AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने इसे जन-विरोधी करार देते हुए 24 घंटे के भीतर इसे वापस लेने की चेतावनी दी है। भारद्वाज ने तंज कसते हुए कहा, सरकार महिलाओं के लिए बस सेवा में बाधा डाल रही है, लेकिन शराबियों को घर बैठे सुविधा देने के लिए तत्पर है। यह करवा चौथ पर महिलाओं के लिए रेखा गुप्ता सरकार का तोहफा है।

कांग्रेस ने भी उठाए सवाल विवाद में कांग्रेस भी कूद पड़ी है। नेता संदीप दीक्षित ने इस ऐप की उपयोगिता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि जब ग्राहकों को शराब लेने के लिए खुद दुकान पर जाना ही पड़ रहा है, तो इस ऑनलाइन बुकिंग का तुक क्या है? उन्होंने इसे ट्रैफिक और अन्य अव्यवस्थाओं को बढ़ावा देने वाला कदम बताया।

क्या है मौजूदा स्थिति? फिलहाल, दिल्ली में शराब खरीदने की सीमा (9 लीटर व्हिस्की और 18 लीटर बीयर) पहले की तरह ही लागू रहेगी। यह ऐप केवल ग्राहकों को अपनी खरीदारी व्यवस्थित करने का एक विकल्प देता है। सरकारी एजेंसियां अभी भी इस विवाद के बीच पारदर्शिता और सुविधा के अपने तर्क पर कायम हैं, जबकि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

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