क्या नेतन्याहू की हार से बदलेंगे भारत-इजरायल के समीकरण? जानिए क्या है भविष्य
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इजरायल में हालिया संसदीय चुनावों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। 1999 के बाद सबसे अधिक 77.7 प्रतिशत मतदान ने संकेत दिया है कि जनता बदलाव के मूड में है। एग्जिट पोल के आंकड़ों के अनुसार, बेंजामिन नेतन्याहू के लिए सत्ता बचाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि नेतन्याहू सत्ता से बाहर होते हैं, तो भारत के साथ दशकों पुराने रिश्तों का क्या होगा?

भारत के साथ संबंधों पर नहीं पड़ेगा नकारात्मक असर जानकारों का मानना है कि नेतन्याहू की सत्ता से विदाई भारत-इजरायल संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव नहीं डालेगी। दोनों देशों के बीच 16 बड़े समझौते हो चुके हैं। भारत को मिलने वाली रक्षा सामग्री, ड्रोन, एयर डिफेंस और साइबर सुरक्षा तकनीक का प्रवाह जारी रहने की पूरी संभावना है। दोनों देशों के बीच संस्थागत संबंध इतने गहरे हैं कि वे किसी एक नेता के सत्ता बदलने से प्रभावित नहीं होते।

व्यापार और निवेश: एक मजबूत आधार भारत और इजरायल के आर्थिक संबंध केवल व्यक्तिगत मित्रता पर निर्भर नहीं हैं। जुलाई 2026 में हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) और सितंबर 2025 का द्विपक्षीय निवेश समझौता इन रिश्तों की नींव हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच 3.93 अरब डॉलर का व्यापार हुआ है। रक्षा से लेकर कृषि और AI तक, दोनों देशों की कंपनियां एक-दूसरे पर निर्भर हैं। कोई भी नई सरकार इन व्यापारिक हितों को नुकसान पहुँचाने का जोखिम नहीं उठाना चाहेगी।

श्रमिकों और तकनीकी समझौतों का भविष्य इजरायल ने भारतीय श्रमिकों को 50,000 वर्क वीजा देने का वादा किया है। कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक सरकारी प्रतिबद्धता है, न कि केवल नेतन्याहू का चुनावी वादा। इसी तरह, कृषि, जल प्रबंधन और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में हो रहे साझा प्रयास इजरायल के अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें नई सरकार प्राथमिकता देना जारी रखेगी।

भारत को करनी होगी नई शुरुआत हालांकि भारत और इजरायल की दोस्ती अटूट है, लेकिन सत्ता परिवर्तन की स्थिति में भारत को अपनी कूटनीति का रुख थोड़ा बदलना पड़ सकता है। प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू के बीच का व्यक्तिगत तालमेल जगजाहिर है। नई सरकार आने पर भारत को इजरायल के नए नेतृत्व के साथ उसी स्तर का व्यक्तिगत और कूटनीतिक विश्वास फिर से बनाना होगा।

क्या होगा भारत का अगला कदम? भारत की विदेश नीति हमेशा पश्चिम एशिया और खाड़ी देशों के साथ संतुलन बैठाने की रही है। यदि इजरायल में नई सरकार क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में काम करती है, तो यह भारत के लिए फायदेमंद साबित होगा। भारत के लिए इजरायल एक ऐसा भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार है, जिसके साथ रिश्ते स्थिरता के सिद्धांत पर आधारित हैं। सरकार बदलने से दिशा नहीं, बल्कि आपसी संवाद के नए तरीके तय होंगे।

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