संयुक्त राष्ट्र में महासंग्राम: अमेरिकी और क्यूबाई राजनयिक भिड़े, बीच सभा में ठप हुई कार्यवाही
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संयुक्त राष्ट्र (UN) की गरिमा उस समय तार-तार हो गई जब अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज और क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्ज पारिला के बीच तीखी बहस हो गई। मामला इतना बढ़ गया कि सदन की कार्यवाही को बीच में ही रोकना पड़ा। यह विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब अमेरिका क्यूबा पर प्रतिबंधों को लेकर अपना पक्ष रख रहा था।

पोडियम के पास पहुंचे क्यूबाई विदेश मंत्री अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज जब अपना संबोधन दे रहे थे, तभी क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्ज पारिला अचानक उनके पोडियम के पास पहुंच गए। पारिला ने वॉल्ट्ज पर झूठ बोलने का आरोप लगाया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

मुझे डराने की कोशिश न करें इस अप्रत्याशित घटना पर अमेरिकी राजदूत ने सख्त रुख अपनाते हुए पारिला को पीछे हटने की चेतावनी दी। वॉल्ट्ज ने दोटूक कहा, यह व्यक्ति पीछे हटे। वह मुझे अमेरिका में वैसे डराने की कोशिश नहीं कर सकते, जैसे वह अपने देश में राजनीतिक कैदियों को डराते हैं। मैं संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रतिनिधि हूं, पीछे हटें।

फिदेल कास्त्रो की घड़ियों पर छिड़ा विवाद विवाद की मुख्य जड़ माइक वॉल्ट्ज का वह संबोधन था जिसमें उन्होंने क्यूबा सरकार को भ्रष्ट बताया। वॉल्ट्ज ने क्यूबा के दिवंगत नेता फिदेल कास्त्रो की एक तस्वीर दिखाते हुए दावा किया कि कास्त्रो दो महंगी रोलेक्स घड़ियां पहनते थे, जिनकी कीमत एक आम क्यूबाई नागरिक की 55 साल की कमाई के बराबर है। उन्होंने क्यूबा सरकार पर जनता को धोखा देने का आरोप लगाया।

नियमों की आड़ में आमना-सामना क्यूबाई विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र के नियम 71 का हवाला देते हुए प्रक्रियात्मक आपत्ति जताई। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिकी राजदूत ने महासभा के नियमों का उल्लंघन किया है। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस होती रही, जिससे माहौल गरमा गया।

प्रवक्ता के साथ कथित मारपीट का वीडियो इस पूरे घटनाक्रम के दौरान एक और विवाद सामने आया है। सामने आए वीडियो में अमेरिकी राजदूत के प्रवक्ता जेपी फ्रेयर के साथ क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य की कथित मारपीट दिखाई दे रही है। दावा किया जा रहा है कि क्यूबा के उस सदस्य ने वीडियो रिकॉर्डिंग करने के दौरान फ्रेयर का आईफोन छीनने की कोशिश की।

यह घटना तब हुई जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में क्यूबा पर लगे लंबे समय से चले आ रहे अमेरिकी प्रतिबंधों की निंदा करने के लिए मतदान होना था। इस तीखी नोकझोंक ने वैश्विक मंच पर दोनों देशों के बीच की गहरी खाई को फिर से उजागर कर दिया है।

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