यूपी में विकास की रफ्तार तेज: 17 हजार करोड़ से बनेंगे चार नए लिंक एक्सप्रेसवे
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उत्तर प्रदेश में सड़क नेटवर्क एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों को मुख्यधारा से जोड़ने और यात्रा को सुगम बनाने के लिए योगी कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में चार नए लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर सरकार 17,542 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करेगी। राज्य सरकार का मानना है कि इससे औद्योगिक क्षेत्रों और दूरस्थ ग्रामीण इलाकों को सीधे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़कर अर्थव्यवस्था को गति दी जाएगी।

कौन से हैं ये चार प्रमुख लिंक एक्सप्रेसवे?

कैबिनेट की मंजूरी के बाद जिन चार परियोजनाओं पर काम शुरू होगा, वे प्रमुख रूप से चार अलग-अलग दिशाओं को कवर करेंगी:

निर्माण में तेजी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने फर्रुखाबाद, झांसी और जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के काम को दो-दो पैकेजों में विभाजित किया है।

3 साल में निर्माण, 5 साल तक रखरखाव की गारंटी

इन परियोजनाओं का निर्माण इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल पर किया जाएगा। सरकार ने निर्माण एजेंसियों के लिए 3 साल की समय-सीमा तय की है।

खास बात यह है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अगले 5 साल तक सड़क के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी भी संबंधित एजेंसी की होगी। इस शर्त से सड़कों की गुणवत्ता लंबे समय तक सुरक्षित बनी रहेगी।

गेम चेंजर साबित होगा नया नेटवर्क

उत्तर प्रदेश में पहले से ही कई एक्सप्रेसवे मौजूद हैं, लेकिन कई क्षेत्र अभी भी मुख्य मार्ग से कटे हुए थे। यह नया नेटवर्क उन छोटे क्षेत्रों को एक मजबूत जाल में पिरोएगा।

विशेष रूप से जेवर एयरपोर्ट तक सीधी पहुंच और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने का कदम पश्चिमी और पूर्वी यूपी के बीच की दूरियों को मिटा देगा। इससे व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में प्रदेश को भारी लाभ होगा।

रोजगार और आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा

17 हजार करोड़ से अधिक का यह निवेश न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। एक्सप्रेसवे के किनारे नए उद्योगों, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स पार्क के विकसित होने की प्रबल संभावना है।

यह परियोजना योगी सरकार के उस लक्ष्य का हिस्सा है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश को देश की शीर्ष आर्थिक महाशक्तियों में से एक बनाने की कवायद तेज है।

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