अदालत की दो टूक: सामाजिक जिम्मेदारी के लिए सरकारी खजाने से फीस लेना गलत
बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रदूषण जागरूकता अभियान के लिए फीस मांगने वाले सेलिब्रिटीज को आड़े हाथों लिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जो फिल्मी हस्तियां शहर के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी नहीं समझतीं और पैसे लेकर ही जागरूक करना चाहती हैं, उनकी मदद की कोई आवश्यकता नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
महाराष्ट्र प्रशासन ने राज्य में त्योहारों के दौरान बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता पैदा करने के लिए कुछ नामचीन हस्तियों से संपर्क किया था। अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने कोर्ट को बताया कि इन सेलिब्रिटीज ने अभियान में शामिल होने के बदले फीस की मांग की, जिसे कोर्ट ने बेहद निराशाजनक बताया।
कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, अगर सेलिब्रिटीज अपने ही शहर के प्रति जागरूक नहीं हैं और सिर्फ फीस लेकर आना चाहते हैं, तो हमें गहरा खेद है। कोर्ट ने सवाल किया कि जो हस्तियां पुलिस के कार्यक्रमों में शामिल हो सकती हैं, वे प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे से क्यों मुंह मोड़ रही हैं?
जनता के पैसे का दुरुपयोग नहीं
अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि जनहित के संदेशों का खर्च सरकारी खजाने यानी जनता के पैसे से नहीं उठाया जाना चाहिए। सेलिब्रिटीज को अपने स्तर पर आगे आकर इस नेक काम में योगदान देना चाहिए। कोर्ट ने साफ कर दिया कि सरकार को ऐसे लोगों के पीछे नहीं भागना चाहिए।
पटाखों और लेजर लाइट पर सख्ती जारी
यह मामला त्योहारों के दौरान होने वाले ध्वनि और वायु प्रदूषण पर स्वतः संज्ञान लेने वाली जनहित याचिका से जुड़ा है। कोर्ट ने पहले ही त्योहारों के दौरान सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने और लेजर लाइट के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। पीठ ने अधिकारियों से पूछा है कि इन आदेशों के प्रचार-प्रसार के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
झुग्गी बस्तियों पर विशेष ध्यान
कोर्ट ने मुंबई की घनी आबादी वाली झुग्गी बस्तियों में प्रदूषण नियमों के लगातार उल्लंघन पर चिंता जताई है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन इलाकों में विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएं और इसमें स्थानीय वार्ड पार्षदों को भी शामिल किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को तय की गई है।
#Breaking: Bombay High Court makes it clear that Celebrities must come forward on their own for creating awareness against bursting firecrackers and that the Maharashtra Government should not pay them through public money.
— Live Law (@LiveLawIndia) October 26, 2026
The bench said that celebrities, who have got so much… pic.twitter.com/Oia23ZDlc5
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