हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को 10,000 रुपये का पीस बॉन्ड भरने का निर्देश दिया गया, जिसे उन्होंने भरने से साफ इनकार कर दिया है। इससे पहले CJP नेताओं के साथ भी ऐसी ही स्थिति देखी गई थी। आखिर यह पुलिस बॉन्ड क्या है और इसे भरने से मना करने के कानूनी नतीजे क्या हो सकते हैं? आइए विस्तार से समझते हैं।
पुलिस बॉन्ड एक औपचारिक लिखित समझौता है। जब किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया जाता है, तो उसे कुछ शर्तों के साथ अस्थायी रूप से रिहा करने के लिए यह बॉन्ड भरवाया जाता है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 9 के तहत मजिस्ट्रेट इसके लिए आदेश देते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरोपी सबूतों के साथ छेड़छाड़ न करे, गवाहों को न डराए और पुलिस या कोर्ट द्वारा बुलाए जाने पर उपस्थित हो।
यदि कोई व्यक्ति बॉन्ड भरने से मना करता है, तो उसे रिहा करने से इनकार किया जा सकता है। पुलिस उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करती है, जो उसे न्यायिक हिरासत (जेल) में भेज सकते हैं। व्यक्ति को तब तक हिरासत में रखा जा सकता है जब तक या तो वह बॉन्ड की शर्तों को मान न ले, या फिर बॉन्ड की अवधि पूरी न हो जाए।
बॉन्ड भरने के बाद यदि कोई व्यक्ति फरार होता है या शर्तों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ निम्नलिखित कार्रवाई हो सकती है:
#WATCH | Delhi: AISA National President Neha Bora says, We don t have any conditions. We are not going to sign the bond.
— ANI (@ANI) October 24, 2026
Yesterday, the Delhi High Court dismissed Neha Bora’s plea challenging the SEM Court notice asking her to execute a ₹10,000 bond with a surety to maintain… pic.twitter.com/SqxTLNNjA7
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