UP MLC चुनाव: अखिलेश यादव का भाजपा पर बड़ा हमला, कहा- धांधली के बावजूद हारेगी सत्ताधारी पार्टी
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उत्तर प्रदेश में 11 विधान परिषद (MLC) सीटों के लिए हुए मतदान के साथ ही सियासी पारा अपने चरम पर है। सूबे की 6 शिक्षक और 5 स्नातक सीटों के लिए हुए इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ी टक्कर है। मतदान संपन्न होने के बाद अब सभी की नजरें 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं।

अखिलेश यादव का तीखा प्रहार सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि शिक्षक और स्नातक मतदाताओं में सरकार के प्रति भारी नाराजगी है, जिसका असर मतदान में साफ दिखा। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि यूपी के सबसे बड़े घुसपैठिए उत्तराखंड के लोग हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इंडिया गठबंधन की मजबूती के चलते भाजपा को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ेगा।

जीत के दावे पर भाजपा अड़ी विपक्ष के आरोपों के बीच यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सभी 11 सीटों पर अपनी जीत सुनिश्चित बताई है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी प्रत्याशी मैदान में हैं और संगठन के कार्यकर्ता पूरी मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। चौधरी ने प्रदेश में शांतिपूर्ण मतदान का हवाला देते हुए दावा किया कि नतीजे भाजपा के पक्ष में ही होंगे।

मतदाता सूची में गड़बड़ी का मुद्दा चुनाव से पहले झांसी, इलाहाबाद और पीलीभीत जैसे जिलों में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई थीं। झांसी में 158 तो पीलीभीत में 10,470 प्रविष्टियां संदिग्ध पाई गईं, जिसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कई अधिकारियों और ऑपरेटरों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। अखिलेश यादव ने इन्हीं गड़बड़ियों को आधार बनाकर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।

फतेहपुर-आगरा में हंगामे के बीच मतदान मतदान के दौरान फतेहपुर, आगरा और मुजफ्फरनगर में सपा और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प और विवाद की खबरें भी सामने आईं। अखिलेश यादव ने फतेहपुर में बूथ कैप्चरिंग की कोशिश का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग को घेरा है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए सपा ने वीडियो साक्ष्य जुटाने का दावा किया है।

अब परिणामों का इंतजार 23 अक्टूबर को संपन्न हुए इस चुनाव के नतीजे 27 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। यह चुनाव न केवल MLC सीटों के लिए है, बल्कि यह शिक्षक और स्नातक वर्ग के बदलते मिजाज का भी संकेत देगा। क्या अखिलेश का दावा सच साबित होगा या भाजपा अपने संगठनात्मक ढांचे के बल पर जीत बरकरार रखेगी? इसका फैसला अब नतीजों के दिन ही होगा।

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