संकट में फंसे भारतीयों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता: पीयूष गोयल
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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बर्लिन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया के किसी भी कोने में संकट के दौरान भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें सुरक्षित स्वदेश वापस लाना भारत सरकार की पहली प्राथमिकता है।

गोयल ने कहा कि भारत की विदेश नीति केवल एडवाइजरी जारी करने तक सीमित नहीं है। भारत सरकार संकट के समय सक्रिय भूमिका निभाती है और नागरिकों को बाहर निकालने के लिए जमीनी स्तर पर हर संभव प्रयास करती है।

यूक्रेन युद्ध का उदाहरण: कैसे बचाए गए 22 हजार भारतीय

पीयूष गोयल ने रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए सरकार की तत्परता को याद किया। उन्होंने बताया कि जब युद्ध शुरू हुआ, तब यूक्रेन में करीब 22,000 भारतीय, मुख्य रूप से छात्र, फंसे हुए थे।

इस कठिन परिस्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से निकासी अभियान की निगरानी की थी। दिल्ली में एक विशेष समन्वय टीम बनाई गई थी और चार वरिष्ठ मंत्रियों को यूक्रेन के पड़ोसी देशों में भेजा गया ताकि निकासी प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सके।

दूसरे देश सिर्फ सलाह देते हैं, भारत हाथ थामता है

मंत्री ने स्पष्ट किया कि कई अन्य देश संकट के समय केवल ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेते हैं, लेकिन भारत का दृष्टिकोण व्यापक है।

भारत न केवल अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालता है, बल्कि कई मौकों पर अन्य देशों के नागरिकों की मदद के लिए भी आगे आता है। गोयल ने कहा कि भारत की यह सक्रियता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की विश्वसनीयता को दर्शाती है।

जर्मनी में केरल की नर्सों का विशेष योगदान

अपने संबोधन में पीयूष गोयल ने भारत-जर्मनी के मजबूत संबंधों का इतिहास साझा करते हुए 1960 के दशक की याद दिलाई। उन्होंने बताया कि उस समय पश्चिमी जर्मनी में नर्सों की भारी कमी थी, जिसे पूरा करने के लिए केरल से 6,000 नर्सों को बुलाया गया था।

उन्होंने कहा कि इन नर्सों ने न केवल जर्मनी की स्वास्थ्य प्रणाली को सहारा दिया, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी भरोसे की एक मजबूत नींव भी रखी।

भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी और भविष्य की राह

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और जर्मनी के संबंध अब एक नई रणनीतिक ऊंचाई पर हैं। इस साल दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे हो रहे हैं।

व्यापार, निवेश और तकनीक के क्षेत्र में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के माध्यम से आर्थिक साझेदारी के नए द्वार खुलने की पूरी संभावना है, जो दोनों देशों के लिए विन-विन स्थिति पैदा करेगा।

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