विदेश नीति पर घमासान: सलमान खुर्शीद का जयशंकर को पलटवार, कहा- इसे कॉलेज की डिबेट न बनाएं
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नई दिल्ली: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की हालिया भारत यात्रा के बाद से शुरू हुआ सियासी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। राहुल गांधी द्वारा इस दौरे पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी, जिस पर अब पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने पलटवार किया है।

विदेश नीति कोई कॉलेज डिबेट नहीं पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने जयशंकर की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि विदेश नीति एक अत्यंत गंभीर विषय है। इसे कॉलेज की बहस या डिबेट की तरह नहीं लिया जाना चाहिए। खुर्शीद ने तर्क दिया कि किसी भी देश की राजधानी का अपना एक कूटनीतिक महत्व होता है और विदेशी नेताओं का वहां आना सरकार के संस्थानों की गरिमा से जुड़ा होता है।

राजधानी की अनदेखी पर सवाल खुर्शीद का कहना है कि राहुल गांधी का सवाल केवल बैठक की जगह को लेकर नहीं है, बल्कि यह इस बात पर है कि हम दूसरे देशों के साथ अपने संबंधों को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई विदेशी नेता राजधानी दिल्ली आए बिना किसी दूसरे शहर में बैठक करता है, तो उसके पीछे के कारणों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

जयशंकर का बचाव और पुराने उदाहरण इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राहुल गांधी के तंज पर बचाव करते हुए पूर्व के उदाहरण दिए थे। जयशंकर ने 1972 के शिमला समझौते का हवाला दिया, जहां इंदिरा गांधी और जुल्फिकार अली भुट्टो की बैठक दिल्ली के बाहर हुई थी। साथ ही, उन्होंने 2013 में सलमान खुर्शीद द्वारा जयपुर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के लिए आयोजित लंच की भी याद दिलाई।

क्या था राहुल गांधी का आरोप? विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मुंबई यात्रा की खबर आई। राहुल गांधी ने इसे लेकर सरकार पर तंज कसते हुए कहा था कि रुबियो ने अपने कर्मचारी (एस. जयशंकर) को मुंबई तलब किया है। कांग्रेस ने इस बात पर भी सवाल उठाए कि इस बैठक की जानकारी अमेरिकी दूतावास द्वारा पहले दी गई, जबकि यह काम भारतीय विदेश मंत्रालय का होना चाहिए था।

सरकार का पक्ष विवाद बढ़ने पर विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मुंबई में बैठक कोई असामान्य बात नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर उस समय मुंबई में अन्य विदेशी अतिथियों की मेजबानी कर रहे थे, जिसके कारण रुबियो के साथ बैठक वहीं तय की गई। सरकार ने दोहराया कि भारत पहले भी दिल्ली और मुंबई जैसे अन्य शहरों में विदेशी मेहमानों का स्वागत करता रहा है।

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