चीन नीति पर मोदी सरकार घिरी: जयराम रमेश ने उठाए सीमा सुरक्षा से लेकर व्यापार घाटे तक पर सवाल
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कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की चीन नीति को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चीन के प्रति सोची-समझी रियायतें देने और सीमा पर तनाव के मुद्दों पर चुप्पी साधे रखने का आरोप लगाया है।

ITBP के प्रदर्शन पर चुप्पी क्यों? जयराम रमेश ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ हालिया आमने-सामने की घटनाओं में ITBP के जवानों ने जिस तरह का साहस दिखाया, उसके लिए उनके महानिदेशक ने भी सराहना की है। लेकिन, प्रधानमंत्री और उनका पूरा तंत्र इस मामले पर पूरी तरह चुप है। उन्होंने दावा किया कि तवांग के तक्सिंग में हुई घटना के बाद गश्त के कई बिंदु भारत के हाथ से निकल गए हैं, जैसा कि पहले लद्दाख में हुआ था।

पारिस्थितिकी और सुरक्षा के लिए खतरा कांग्रेस नेता ने चिंता जताई कि चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश के भारतीय क्षेत्रों के नाम बदल रहा है। साथ ही, चीन द्वारा सीमा पर 60,000 मेगावाट क्षमता का बांध बनाया जा रहा है, जो भारत की जल सुरक्षा और पारिस्थितिकी के लिए एक गंभीर खतरा है।

मेक इन इंडिया बना इंपोर्ट फ्रॉम चाइना भारत और चीन के बीच बढ़ते व्यापार घाटे को रमेश ने राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। उन्होंने दावा किया कि 2025-26 में यह घाटा रिकॉर्ड 112 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष 99 अरब डॉलर था। उन्होंने कहा कि इससे भारत के MSME सेक्टर को भारी नुकसान हो रहा है और मेक इन इंडिया का नारा इंपोर्ट फ्रॉम चाइना में बदल गया है।

2020 के बयान पर फिर गरमाई सियासत रमेश ने 19 जून 2020 को गलवान घाटी संघर्ष के बाद प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए उस विवादास्पद बयान को याद किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि न वहां कोई हमारी सीमा में घुस आया है और न ही कोई घुसा हुआ है। कांग्रेस सांसद का आरोप है कि इसी बयान की कीमत आज भारत को चीन के प्रति सरकार के ढुलमुल रुख के रूप में चुकानी पड़ रही है।

ऑपरेशन सिंदूर और सैन्य विरोधाभास कांग्रेस सांसद ने ऑपरेशन सिंदूर में चीन की भूमिका को लेकर भी चौंकाने वाले दावे किए। उन्होंने कहा कि उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने पाकिस्तान के अभियानों में चीन की गहरी संलिप्तता की पुष्टि की थी, लेकिन बाद में सेवानिवृत्त CDS जनरल अनिल चौहान ने सार्वजनिक रूप से इसका खंडन कर दिया। रमेश ने आरोप लगाया कि ऐसे विरोधाभासी बयानों के पीछे राजनीतिक एजेंडा काम कर रहा है।

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