डोनाल्ड ट्रंप की रैलियों में बवाल: विरोधियों पर चले घूंसे, सुरक्षा घेरा तोड़कर मंच तक पहुंचा प्रदर्शनकारी
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अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की रैलियों में लगातार हो रहे हंगामे और हिंसा ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।

साउथ कैरोलिना में भाषण के बीच घूंसेबाजी बुधवार को साउथ कैरोलिना की क्लेमसन यूनिवर्सिटी में आयोजित रैली में स्थिति उस समय बिगड़ गई जब लगभग 12 प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप के भाषण में व्यवधान डाला। एक प्रदर्शनकारी को तो मंच के पास ही ट्रंप के एक समर्थक ने जोरदार मुक्का मार दिया।

हैरानी की बात यह रही कि ट्रंप ने मंच से हमलावर समर्थक की तारीफ की और उसकी तुलना मशहूर बॉक्सर इवांडर होलीफील्ड से कर दी। रैली के दौरान एक अन्य प्रदर्शनकारी को भी थप्पड़ मारने की घटना सामने आई है।

जेडी वेंस की रैली में सुरक्षा में बड़ी चूक उधर, ओहायो के सिनसिनाटी में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की रैली में सुरक्षा में बड़ी सेंध लगी। एक प्रदर्शनकारी ने रिपब्लिकन समर्थक का वेश बनाया हुआ था, लेकिन वह अचानक वेंस के बिल्कुल पीछे सुरक्षा घेरे में पहुंच गया। उसने अपनी MAGA टोपी फेंकी और चिल्लाते हुए विरोध जताया। सीक्रेट सर्विस के एजेंटों ने तुरंत उसे मौके से हटाया। बाद में वेंस ने प्रदर्शनकारी के लुक का मजाक उड़ाते हुए उसे डेमोक्रेट समर्थक करार दिया।

विपक्ष का विरोध और बढ़ती चुनौतियां ट्रंप की रैलियों में विरोध प्रदर्शन अब आम हो गए हैं। ओहायो, जॉर्जिया, कंसास और नॉर्थ कैरोलिना में भी लोग खुलकर विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के मुख्य मुद्दों में एपस्टीन फाइलें सार्वजनिक करने की मांग, इमिग्रेशन नीति और ईरान युद्ध को लेकर असंतोष शामिल है। दूसरी ओर, ट्रंप ऐसे प्रदर्शनकारियों को पैसे लेकर आने वाले लोग बताकर खारिज कर देते हैं।

चुनावी गणित और गिरती रेटिंग ट्रंप के लिए 3 नवंबर का मिडटर्म चुनाव बेहद अहम है। मौजूदा रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी अप्रूवल रेटिंग 31-33 फीसदी के निचले स्तर पर है। बढ़ती महंगाई और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता का असर उनकी लोकप्रियता पर साफ दिख रहा है।

यदि रिपब्लिकन पार्टी इन चुनावों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाती है, तो ट्रंप के लिए अपने आगामी एजेंडे और नीतियों को कांग्रेस से पारित कराना लगभग असंभव हो जाएगा। फिलहाल, रैलियों में लगातार हो रही नारेबाजी उनके चुनाव प्रचार के संदेश को कमजोर कर रही है।

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