# जेल से छूटते ही ज्ञानू के खिलाफ हुंकार, सौरव दास और आशुतोष रांका ने फिर छेड़ा संग्राम
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सीजेपी नेताओं की जेल से वापसी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका जेल से बाहर आते ही फिर से सक्रिय हो गए हैं। नौ दिनों की न्यायिक हिरासत के बाद रिहा होते ही इन नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए साफ कर दिया कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

ज्ञानू को जाना होगा जेल से निकलते ही सौरव दास ने अपना पहला पोस्ट लिखा— Gyanu has to go (ज्ञानू को जाना होगा)। वहीं, पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके ने भी तिरंगा थामे हुए दोनों नेताओं का एक वीडियो साझा किया है, जिसमें वे इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं। दीपके ने भी वीडियो के कैप्शन में यही दोहराया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद छोड़ना होगा।

क्यों हुई थी गिरफ्तारी? यह मामला 13 अक्टूबर का है, जब सौरव दास और आशुतोष रांका जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पहुंचे थे। पुलिस का आरोप था कि उन्होंने निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए बैरिकेड्स पार किए और बिना अनुमति के विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया और शांति भंग करने के आरोप में जेल भेज दिया गया।

हाईकोर्ट से मिली राहत, फिर SEM कोर्ट का रुख दोनों नेताओं ने अपनी हिरासत को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने उन्हें निचली अदालत (SEM कोर्ट) में जाने की सलाह दी। इसके बाद विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट रितु राज की अदालत ने 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत और जमानती बॉन्ड पर उन्हें रिहा करने का आदेश दिया।

कानूनी शर्तों के साथ रिहाई तिहाड़ जेल से बाहर आने से पहले दोनों नेताओं ने अदालत को एक लिखित वचनपत्र सौंपकर भरोसा दिलाया है कि वे कानून-व्यवस्था नहीं बिगाड़ेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए कानूनी रूप से अधिकृत नहीं किया जाता, तब तक वे वहां कोई विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे। भविष्य के सभी आंदोलन संविधान के दायरे में रहकर करने का आश्वासन दिया गया है।

आगे की क्या है रणनीति? अब सभी की निगाहें CJP की आगामी बैठक पर हैं। पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके ने संकेत दिए हैं कि नेताओं की रिहाई के बाद जल्द ही रणनीति तय की जाएगी। हालांकि, कोर्ट में दिए गए लिखित आश्वासन और कानूनी पाबंदियों के बीच, पार्टी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना अगला कदम कैसे उठाती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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