ईरान का अमेरिका को अल्टीमेटम: मुनीर के जरिए भेजी 7 शर्तें, माननी होंगी वरना...!
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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। तेहरान ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के जरिए वाशिंगटन को कड़ा संदेश भेजा है। ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर पश्चिम एशिया में शांति बहाल करनी है, तो अमेरिका को उसकी 7 शर्तें माननी होंगी।

आसिम मुनीर की तेहरान यात्रा और मध्यस्थता की कोशिश

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने हाल ही में तेहरान का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र ग़ालिबाफ़ से मुलाकात की। पाकिस्तान इस क्षेत्र में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है ताकि बढ़ते संघर्ष को रोका जा सके।

ईरान की 7 शर्तें: अमेरिका के सामने रखी मांगें

ईरान ने युद्ध रोकने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के बदले जो मुख्य शर्तें रखी हैं, उनमें शामिल हैं:

  1. युद्धविराम: लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य संघर्ष तुरंत रोका जाए।
  2. नाकेबंदी का अंत: ईरान के समुद्री बंदरगाहों से अमेरिकी प्रतिबंध और नाकेबंदी हटाई जाए।
  3. तेल निर्यात पर छूट: कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों के निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं।
  4. संपत्ति की वापसी: विदेशों में फ्रीज की गई ईरान की धनराशि जारी की जाए।
  5. संप्रभुता का सम्मान: ईरान के आंतरिक मामलों में अमेरिकी हस्तक्षेप बंद हो।
  6. इस्लामाबाद MoU का पालन: पहले हुए सभी समझौतों का वाशिंगटन कड़ाई से पालन करे।
  7. गारंटी: भविष्य में एकतरफा और अवैध प्रतिबंध न लगाने की कानूनी गारंटी दी जाए।

क्या 6 दिन में सामान्य होंगे हालात?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका इन शर्तों को स्वीकार कर लेता है, तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को मात्र 6 दिनों के भीतर दोबारा खोला जा सकता है। इसके बाद सातवें दिन से औपचारिक बातचीत का नया दौर शुरू हो सकता है।

क्यों टूटा इस्लामाबाद समझौता ?

जून में अमेरिका और ईरान के बीच शांति बहाल करने के लिए इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ था। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने न केवल इस समझौते का उल्लंघन किया, बल्कि लगातार धमकियां भी दीं। इसी भरोसे के संकट के कारण अब ईरान ने ठोस कानूनी गारंटी की मांग की है।

परमाणु सामग्री पर तेहरान का सख्त रुख

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने जनरल मुनीर के साथ बैठक में स्पष्ट कर दिया कि ईरान अपने परमाणु रुख से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा, ईरान की समृद्ध परमाणु सामग्री का एक कण भी देश से बाहर नहीं जाएगा।

अब पूरी दुनिया की निगाहें अमेरिका पर टिकी हैं कि क्या वह इन शर्तों को मानकर तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाएगा या फिर पश्चिम एशिया में टकराव और गहरा जाएगा।

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