देश में चल रहे चुनावी सुधारों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर शुरू हुआ विवाद अब रिजीम चेंज (सत्ता बदलाव) की बहस तक पहुंच गया है। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और विपक्षी नेताओं के एक धड़े ने इसे आंदोलन का मुख्य लक्ष्य बनाना शुरू किया है, लेकिन अब उनके ही साथी योगेंद्र यादव ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।
क्या है रिजीम चेंज का विवाद? हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रशांत भूषण, सीजेपी के अभिजीत दिपके और एआईएसए की नेहा बोरा ने रिजीम चेंज की हुंकार भरी थी। प्रशांत भूषण ने आक्रामक तेवर अपनाते हुए कहा था कि वे सरकार बदलकर रहेंगे। वहीं, कुछ नेताओं ने बांग्लादेश के हालिया घटनाक्रम का उदाहरण देकर इसे आंदोलन की दिशा के रूप में पेश किया।
योगेंद्र यादव ने दिया आईना स्वराज इंडिया के प्रमुख योगेंद्र यादव ने अपने सहयोगियों के इस अति-उत्साह को हकीकत से दूर बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क पर चलने वाले आम नागरिक की राय उन लोगों से बिल्कुल अलग है जो राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हैं। यादव ने कहा, अगर केवल हमारी राय से दुनिया बदलती, तो बदलाव दो साल पहले ही हो गया होता।
अति-उत्साह से आंदोलन को नुकसान योगेंद्र यादव ने चेताया कि नेता को जनता से केवल एक कदम आगे रहकर नेतृत्व करना चाहिए, न कि ऐसी मांगें थोपनी चाहिए जो जनता की आवाज नहीं हैं। उन्होंने कहा, आंदोलन में अभी जो ऊर्जा है, वह इसलिए है क्योंकि यह मामला हार्डकोर राजनीतिक दलों के दायरे से बाहर निकलकर आम लोगों तक पहुंचा है। अपने अति-उत्साह में हम अगर ऐसी मांगें रखेंगे, तो इससे आंदोलन को फायदे के बजाय नुकसान होगा।
डैमेज कंट्रोल में जुटा विपक्ष प्रशांत भूषण के बयानों के बाद भाजपा ने आंदोलन के असली उद्देश्यों पर सवाल खड़े कर दिए थे। विवाद बढ़ता देख सीजेपी के अभिजीत दिपके को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने अपना बचाव करते हुए कहा कि उनका आंदोलन सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि केवल निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए है।
जनता की नब्ज पहचानना जरूरी योगेंद्र यादव ने अपने साथियों से हाथ जोड़कर अपील की है कि वे पॉलिटिकल जजमेंट का ध्यान रखें। उन्होंने स्वीकार किया कि भविष्य में जनता खुद रिजीम चेंज की मांग कर सकती है, लेकिन वर्तमान हालात में यह मांग जनता की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है। योगेंद्र यादव की यह टिप्पणी विपक्ष के उस धड़े के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है, जो चुनावों से इतर सीधे सत्ता परिवर्तन को आंदोलन का मुख्य एजेंडा बनाना चाहता है।
Regime Change का हौवा ! pic.twitter.com/Cokc61cYmf
— Yogendra Yadav (@_YogendraYadav) October 19, 2026
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