अंतरिक्ष में लहलहाई फसल: चीन ने धरती से 400 KM ऊपर उगाया चावल, रचा इतिहास
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धरती से सैकड़ों किलोमीटर ऊपर, जहां न खेत हैं और न मिट्टी, वहां चीन के तियांगोंग स्पेस स्टेशन पर धान की फसल तैयार की जा रही है। अंतरिक्ष यात्रियों ने चावल उगाने के प्रयोग में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिससे भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए भोजन की आत्मनिर्भरता का रास्ता साफ हो गया है।

बीज से बीज तक: एक अनूठा सफर इस प्रयोग की शुरुआत धान के बीजों से हुई, जिन्हें माइक्रोग्रैविटी (बेहद कम गुरुत्वाकर्षण) वाले माहौल में बोया गया। अंतरिक्ष यात्रियों ने इन पौधों के अंकुरित होने, फूल आने और नए बीज बनने की पूरी प्रक्रिया को बारीकी से देखा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब इन पौधों से मिले बीजों का इस्तेमाल दूसरी पीढ़ी की फसल उगाने के लिए किया जा रहा है।

अगली पीढ़ी का परीक्षण वैज्ञानिक यह समझना चाहते हैं कि क्या अंतरिक्ष में उगे पौधों के बीज अगली पीढ़ी के लिए भी सक्षम हैं। यह प्रयोग सिर्फ चावल उगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य यह पता लगाना है कि अंतरिक्ष का माहौल पौधों के जीन और उनकी कार्यप्रणाली (एपिजेनेटिक्स) को कैसे प्रभावित करता है। क्या अंतरिक्ष में कई पीढ़ियों तक खेती करना संभव है? यह सवाल भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए जीवन रेखा साबित हो सकता है।

धरती से सप्लाई की निर्भरता होगी खत्म फिलहाल, अंतरिक्ष यात्रियों को अपने भोजन के लिए पूरी तरह धरती से भेजी जाने वाली सप्लाई पर निर्भर रहना पड़ता है। यदि भविष्य में अंतरिक्ष में ही खाद्य उत्पादन की तकनीक विकसित हो जाती है, तो लंबे मानव मिशनों (जैसे मंगल ग्रह की यात्रा) के दौरान रसद की भारी कमी को दूर किया जा सकेगा।

क्या है तियांगोंग स्पेस स्टेशन? टियांगोंग का अर्थ है स्वर्ग में बना महल । यह चीन का अपना अंतरिक्ष स्टेशन है जो पृथ्वी से लगभग 340 से 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगाता है। तीन मुख्य मॉड्यूल (तियानहे, वेंटियन और मेंगटियन) से बना यह स्टेशन चीन की महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष योजनाओं का केंद्र है। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से अलग, यह चीन को स्वतंत्र रूप से लंबे समय तक शोध करने की सुविधा देता है।

जीन और अंतरिक्ष का गणित धरती के जीव लाखों वर्षों से यहाँ के गुरुत्वाकर्षण के अनुकूल विकसित हुए हैं। अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण की कमी से पौधों के विकास पर क्या असर पड़ता है, वैज्ञानिक इसकी तुलना 2022 में धरती पर वापस लाए गए चावल के बीजों से कर रहे हैं। इस शोध से यह स्पष्ट होगा कि क्या अंतरिक्ष का प्रभाव अगली पीढ़ियों तक बना रहता है या पौधे खुद को नई परिस्थितियों के अनुसार ढाल लेते हैं।

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