पुजारा के साथ डेब्यू, सचिन का लिया विकेट: अब अंपायर की भूमिका में नजर आ रहे ऑस्ट्रेलिया के ये पूर्व तेज गेंदबाज
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क्रिकेट की दुनिया में अक्सर ऐसे खिलाड़ी देखने को मिलते हैं जिनका सफर बेहद छोटा होता है, पर उनकी यादें अमिट होती हैं। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज पीटर जॉर्ज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। साल 2010 में इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखने वाले यह खिलाड़ी अब एक नई भूमिका में अपनी दूसरी पारी शुरू कर चुका है।

पुजारा के साथ शुरू किया सफर

अक्टूबर 2010 में बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए टेस्ट मैच ने दो भविष्य के खिलाड़ियों को मंच दिया था। एक तरफ भारतीय टीम का भविष्य चेतेश्वर पुजारा थे, तो दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया के लंबे कद के तेज गेंदबाज पीटर जॉर्ज । हालांकि, इस टेस्ट के बाद दोनों खिलाड़ियों का करियर बिल्कुल अलग दिशाओं में चला गया।

सचिन तेंदुलकर बने थे पहला शिकार

पीटर जॉर्ज के लिए अपना इकलौता टेस्ट मैच यादगार रहा। उन्होंने उस मुकाबले में अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाया और महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को आउट कर अपने टेस्ट करियर का पहला विकेट चटकाया। उन्होंने उस पारी में कुल दो विकेट लिए थे—सचिन तेंदुलकर और जहीर खान। यह मुकाबला भले ही भारत ने सात विकेट से जीता हो, लेकिन पीटर जॉर्ज के लिए एक दिग्गज को पवेलियन भेजना हमेशा के लिए एक बड़ी उपलब्धि बन गया।

इंटरनेशनल क्रिकेट से दूरी और घरेलू करियर

इस एक टेस्ट मैच के बाद पीटर जॉर्ज को दोबारा ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए खेलने का मौका नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और घरेलू क्रिकेट में साउथ ऑस्ट्रेलिया और क्वींसलैंड के लिए करीब एक दशक तक अपना योगदान दिया। उन्होंने खेल के प्रति अपनी निरंतरता बनाए रखी और मैदान से जुड़े रहे।

अब अंपायर के तौर पर नई शुरुआत

खेल को अलविदा कहने के बाद पीटर जॉर्ज ने अंपायरिंग को अपना करियर चुना। उन्होंने 2021-22 के घरेलू सत्र से अंपायरिंग की बारीकियां सीखीं और मेहनत के दम पर अपनी जगह बनाई। अब उन्हें क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के 2026-27 सीजन के कॉन्ट्रैक्टेड अंपायर पैनल में शामिल किया गया है।

हाल ही में, 17 अक्टूबर 2026 को एडिलेड के करेन रॉल्टन ओवल में साउथ ऑस्ट्रेलिया और क्वींसलैंड के बीच खेले गए वनडे कप मैच में पीटर जॉर्ज को अंपायर के रूप में देखा गया। खिलाड़ी से अंपायर बनने का उनका यह सफर साबित करता है कि क्रिकेट के प्रति जुनून हो, तो मैदान पर वापसी के रास्ते हमेशा खुले रहते हैं।

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