जंतर-मंतर बनाम व्यापार: प्रदर्शनों से ठप होता कारोबार, व्यापारियों ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
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नई दिल्ली: राजधानी में जंतर-मंतर को नियमित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने की मांग अब जोर पकड़ चुकी है। कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ और खान मार्केट के व्यापारी संगठनों ने दिल्ली के उपराज्यपाल को संयुक्त पत्र लिखकर प्रदर्शनों के कारण हो रही समस्याओं से अवगत कराया है।

कारोबार पर गहरा संकट व्यापारियों का कहना है कि जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों के दौरान बैरिकेडिंग और रास्तों के बंद होने से बाजारों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। जुलाई और अक्टूबर 2026 में हुए प्रदर्शनों का हवाला देते हुए कारोबारियों ने बताया कि दुकानें जल्दी बंद करने के आदेश से उन्हें भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा है। ग्राहकों का बाजार तक न पहुंच पाना और कर्मचारियों की आवाजाही बाधित होना बड़ी समस्या बन गया है।

सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं व्यापारी संगठनों ने पत्र में सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि संकरे इलाकों में भीड़ के कारण भगदड़, आगजनी या किसी आपात स्थिति में सुरक्षा के बंदोबस्त पर्याप्त नहीं हैं। एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाओं के लिए रास्ता मिलना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है, जिससे आम लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई खान मार्केट एसोसिएशन और दिल्ली किराना कमेटी ने प्रदर्शनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने माना कि छोटे दुकानदारों की आजीविका दांव पर है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि NDMC के आदेशों या प्रदर्शनों के कारण कारोबार ठप होता है और नुकसान होता है, तो कोर्ट इस पर विचार करेगा और टॉर्ट कानून (Law of Tort) के तहत मुआवजे के आदेश भी दे सकता है।

प्रदर्शन के लिए नई जगह की मांग व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन करते हुए कहा है कि इसे जनजीवन और व्यापार के अधिकार के साथ संतुलित किया जाना चाहिए। उन्होंने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाने की मांग की है। इसके विकल्प के रूप में रामलीला मैदान या बुराड़ी जैसे खुले मैदानों का सुझाव दिया गया है।

प्रमुख मांगें और भविष्य की राह व्यापारी संगठनों ने तीन सूत्रीय मांगें रखी हैं:

  1. जंतर-मंतर पर मौजूदा सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की तत्काल समीक्षा हो।
  2. प्रदर्शनों को जंतर-मंतर से हटाकर किसी बड़े खुले स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।
  3. व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ उपराज्यपाल की उच्च-स्तरीय बैठक हो।

दिल्ली पुलिस कमिश्नर, गृह मंत्रालय और मुख्य सचिव को भेजी गई इस अर्जी पर अब प्रशासन के रुख का इंतज़ार है। सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले की अगली सुनवाई 26 तारीख को प्रस्तावित है, जहाँ कारोबारियों के नुकसान पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।

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