प्रहार फिल्म रिव्यू: क्या 26/11 और उज्ज्वल निकम की कहानी से न्याय कर पाए राजकुमार राव?
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राजकुमार राव अभिनीत फिल्म प्रहार आखिरकार सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। यह फिल्म देश के चर्चित वकील उज्ज्वल निकम की बायोपिक है, जो मुख्य रूप से 26/11 मुंबई आतंकी हमले और अजमल कसाब के खिलाफ लड़ी गई कानूनी जंग पर आधारित है। अपनी विषयवस्तु के कारण यह फिल्म रिलीज से पहले ही चर्चा में थी।

कहानी और विषय का भार फिल्म का केंद्र बिंदु वह चार साल का लंबा संघर्ष है, जिसे उज्ज्वल निकम ने कसाब को सजा दिलाने के लिए तय किया था। फिल्म उन सवालों को खंगालने की कोशिश करती है जो आज भी 18 साल बाद प्रासंगिक हैं—जैसे कि एक आतंकवादी को मुकदमा चलाने का अधिकार क्यों दिया गया? और एक भारतीय वकील ने दुश्मन के लिए अदालत में बचाव का रास्ता कैसे अपनाया?

दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दर्शकों और समीक्षकों ने इस फिल्म को लेकर अपनी राय साझा की है। ज्यादातर लोग इस बात पर सहमत हैं कि फिल्म के पास एक दमदार विषय तो था, लेकिन उसका निष्पादन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।

कमजोर पटकथा और निर्देशन पर सवाल अनेक दर्शकों का मानना है कि निर्देशक अविनाश अरुण इस गंभीर विषय के साथ पूरी तरह न्याय नहीं कर पाए हैं। फिल्म की सबसे बड़ी खामी इसकी पेसिंग (गति) और पटकथा है। फिल्म की लंबाई को अनावश्यक रूप से खींचा गया है, जिससे यह कहीं-कहीं उबाऊ और बिखरी हुई लगती है। पटकथा के कई हिस्से कहानी के मूल उद्देश्य से भटक जाते हैं।

राजकुमार राव के अभिनय पर राय राजकुमार राव जैसे मंझे हुए अभिनेता के लिए यह फिल्म मिली-जुली प्रतिक्रिया लेकर आई है। कुछ दर्शकों को उनका काम ठीक लगा, तो वहीं कईयों का मानना है कि वे कोर्टरूम के दृश्यों में उस तीव्रता को नहीं दिखा पाए जिसकी दरकार थी। विशेष रूप से उनके लहजे (एक्सेन्ट) को लेकर भी दर्शकों ने असंतोष जाहिर किया है। वहीं, वामिका गब्बी के किरदार को लेकर भी लोगों ने निराशा जताई है, क्योंकि उन्हें स्क्रीन पर बहुत कम जगह दी गई है।

अंतिम फैसला: एक अवसर जिसे खो दिया गया कुल मिलाकर, प्रहार को एक अधूरी कोशिश कहा जा सकता है। फिल्म में कुछ कोर्टरूम ड्रामा और दमदार भाषणों के अंश मौजूद हैं जो ध्यान खींचते हैं, लेकिन एक बायोपिक के तौर पर यह फिल्म भावनात्मक गहराई और कसावट की कमी से जूझ रही है। अगर फिल्म की लंबाई कम होती और कहानी पर अधिक ध्यान दिया गया होता, तो शायद इसका असर दर्शकों पर गहरा होता। फिलहाल, यह फिल्म केवल उन लोगों के लिए है जो कानूनी ड्रामा में रुचि रखते हैं।

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