राहुल गांधी की पोस्टर गर्ल नेहा बोरा का विवादों से नाता: कभी खोपड़ी वाली टीशर्ट तो कभी बांग्लादेश क्रांति से तुलना
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नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के नेतृत्व में चुनाव आयोग के खिलाफ जारी प्रदर्शनों के बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। नेहा बोरा इन दिनों प्रदर्शनों में सबसे प्रमुख चेहरा बनकर उभरी हैं, लेकिन उनके विवादास्पद बयानों और पहनावे ने नई बहस को जन्म दे दिया है।

खोपड़ी वाली टीशर्ट और प्रतीकवाद

हाल ही में दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में नेहा बोरा एक अजीबोगरीब खोपड़ी (Skull) वाली टी-शर्ट पहनकर सड़कों पर उतरीं। इस टी-शर्ट पर वन पीस लिखा हुआ था।

यह प्रतीक नेपाल में हुए जेन-जेड (Gen-Z) प्रदर्शनों के दौरान भी देखा गया था, जो सत्ता के खिलाफ विद्रोह का संकेत माना जाता है। इतिहास में समुद्री लुटेरे इसी तरह के झंडों का इस्तेमाल आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने हेतु करते थे। नेहा का यह पहनावा सोशल मीडिया पर खासी चर्चा का विषय बना हुआ है।

बांग्लादेश क्रांति से तुलना का विवाद

नेहा बोरा ने अब एक और बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने भारत के छात्र आंदोलनों की तुलना बांग्लादेश क्रांति से की है। बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट के सम्मेलन में एक संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के छात्र आंदोलन ने उन्हें क्रांति का रास्ता दिखाया है।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बांग्लादेश में युवा जिस तरह धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ रहे हैं, उसी तरह भारत में छात्र मोदी सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके इस बयान पर अब राजनीतिक गलियारों में कड़ी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं और भाजपा ने इसे देश के प्रति नकारात्मक नैरेटिव सेट करने की कोशिश बताया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामे की स्थिति

विवाद सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं हैं। हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब नेहा बोरा ने अपनी बात रखनी शुरू की, तो वहां मौजूद लोगों ने बंद करो के नारे लगाने शुरू कर दिए। प्रदर्शनों के दौरान उनकी मौजूदगी और राहुल गांधी के साथ करीबी जुड़ाव के कारण उन्हें राहुल गांधी की पोस्टर गर्ल कहा जाने लगा है।

चुनाव आयोग के खिलाफ एकजुटता

राहुल गांधी और सीजेपी नेता अभिजीत दीपके के साथ मिलकर नेहा बोरा लगातार चुनाव आयोग पर दबाव बना रही हैं। उनका मुख्य विरोध वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को रद्द करने और सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने को लेकर है।

जहां एक ओर नेहा बोरा इन आंदोलनों को क्रांति का रूप दे रही हैं, वहीं विपक्ष और सरकार समर्थक इसे देश की संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की एक सुनियोजित साजिश के रूप में देख रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि नेहा बोरा का यह विद्रोही अंदाज आने वाले दिनों में और कौन से नए विवादों को जन्म देता है।

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