अंकिता भंडारी के माता-पिता की इंडिया गेट पर गिरफ्तारी: न्याय की मांग पर मचा सियासी घमासान
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उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर दिल्ली के इंडिया गेट पर न्याय की गुहार लगा रहे अंकिता के माता-पिता को आधी रात को पुलिस हिरासत में ले लिया गया। गुरुवार तड़के करीब 5 बजे उन्हें रिहा किया गया, लेकिन इस कार्रवाई ने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।

हिरासत और 24 घंटे का अल्टीमेटम

बुधवार देर रात जब प्रदर्शन जारी था, तभी पुलिस ने अंकिता के माता-पिता वीरेंद्र भंडारी और सोनी देवी को हिरासत में ले लिया। रिहाई के बाद परिवार ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। माता-पिता ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे अपने घर पर भूख हड़ताल करेंगे और पूरे देश से जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।

परिवार की मुख्य मांगें: राज्यपाल की नियुक्ति पर सवाल

अंकिता के परिवार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से गुहार लगाई है कि जब तक मामले की निष्पक्ष और गहन जांच नहीं हो जाती, तब तक दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। परिवार का आरोप है कि मामले में एक प्रभावशाली VIP को बचाने की कोशिश की जा रही है, जिसकी भूमिका की जांच होनी आवश्यक है।

जांच में खामियों के गंभीर आरोप

परिजनों ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पांच प्रमुख मांगें रखी हैं:

  1. VIP एंगल: मामले में कथित प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका की सीबीआई से जांच हो।
  2. गवाह और बयान: उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर के बयानों को जांच में शामिल किया जाए।
  3. डिजिटल साक्ष्य: आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड की दोबारा सूक्ष्म जांच हो।
  4. सबूतों का विनाश: रिजॉर्ट तोड़े जाने के पीछे के असली कारणों की पड़ताल हो।
  5. न्यायिक हस्तक्षेप: राष्ट्रपति के समक्ष अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए।

कांग्रेस का समर्थन और सरकार पर निशाना

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर परिवार के प्रति समर्थन जताया था। गिरफ्तारी के बाद पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत और उदय भानु चिब समेत कई कांग्रेसी नेताओं को भी हिरासत में लिया गया। पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार न्याय की मांग करने वालों की आवाज दबा रही है और आरोपियों को संवैधानिक पद दिए जा रहे हैं।

क्या था अंकिता भंडारी हत्याकांड?

19 वर्षीय अंकिता भंडारी की 18 सितंबर 2022 को उत्तराखंड के एक रिजॉर्ट में हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य (पूर्व भाजपा नेता का बेटा) सहित तीन लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। अब परिवार द्वारा उठाए गए नए सवालों ने इस पुराने घाव को फिर से ताजा कर दिया है, जिससे राजनीतिक पारा एक बार फिर चढ़ गया है।

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