लद्दाख पर चीन की बौखलाहट: भारत का करारा जवाब, फर्जी दावों से नहीं बदलेगी हकीकत
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लद्दाख को लेकर भारत और चीन के बीच एक बार फिर तनाव गहरा गया है। हाल ही में भारत द्वारा लद्दाख के 28 स्थानों के नाम आधिकारिक नक्शे पर दर्ज करने पर चीन ने आपत्ति जताई थी, जिस पर भारत ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए ड्रैगन को आईना दिखाया है।

चीन के दावों को भारत ने नकारा विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने चीन की आपत्तियों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। भारत ने दो टूक कहा कि चीन के किसी भी तरह के इनकार या फर्जी दावों से यह जमीनी हकीकत नहीं बदल सकती।

क्यों उठाए गए ये कदम? गृह मंत्रालय ने हाल ही में लद्दाख के 28 स्थानों—जिसमें पर्वत चोटियां, दर्रे, ग्लेशियर, नदियां और झीलें शामिल हैं—को भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) के आधिकारिक नक्शे पर मानक नामों के साथ दर्ज किया है। सरकार का उद्देश्य इन स्थानों की भौगोलिक पहचान को स्पष्ट करना और स्थानीय निवासियों व प्रशासन के बीच जागरूकता बढ़ाना है।

अक्साई चिन और पुराना सीमा विवाद भारत और चीन के बीच सीमा विवाद दशकों पुराना है। भारत का स्पष्ट मानना है कि चीन ने लद्दाख के लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र (अक्साई चिन) पर अवैध कब्जा कर रखा है। चीन के बेतुके दावे और सीमा पर अपनी व्याख्या थोपने की कोशिशें इस विवाद को लगातार जटिल बनाती रही हैं।

गलवान के बाद डगमगाई स्थिति जून 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद से दोनों देशों के बीच संबंधों में बड़ी गिरावट आई थी। हालांकि, अक्टूबर 2024 में देपसांग और डेमचोक में गश्त को लेकर हुए समझौते से कुछ हद तक बर्फ पिघली थी, लेकिन यह महज एक छोटी शुरुआत है। पूर्ण सीमा विवाद का समाधान अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

भारत का रुख अडिग चीन की आपत्ति पर भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। प्रशासनिक स्पष्टता और भौगोलिक अधिकार क्षेत्र को परिभाषित करना भारत का आंतरिक मामला है, जिस पर किसी भी बाहरी देश की टिप्पणी का कोई स्थान नहीं है।

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