अनुच्छेद-32 का दांव: राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट से क्यों लगाई गुहार, क्या है ‘संविधान की आत्मा’?
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने INDIA ब्लॉक के 10 प्रमुख नेताओं के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामला चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका का है। इस याचिका के लिए संविधान के सबसे शक्तिशाली हथियार अनुच्छेद-32 को चुना गया है।

क्या है अनुच्छेद-32? संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर ने अनुच्छेद-32 को संविधान का हृदय और आत्मा कहा था। यह नागरिकों को संवैधानिक उपचारों का अधिकार देता है। इसका सीधा अर्थ है कि यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन होता है, तो वह बिना किसी निचली अदालत के चक्कर काटे, सीधे सुप्रीम कोर्ट में न्याय की गुहार लगा सकता है।

विपक्ष ने क्यों खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा? विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाकर नागरिकों के वोट देने के अधिकार का हनन किया है। विपक्ष ने मांग की है कि:

अनुच्छेद-32 की विशेष ताकतें इस अनुच्छेद के तहत, सुप्रीम कोर्ट मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए पांच तरह के कानूनी आदेश (Writs) जारी कर सकता है:

  1. बंदी प्रत्यक्षीकरण: अवैध हिरासत के खिलाफ।
  2. परमादेश: सरकारी अधिकारी को उसके कर्तव्य पालन का आदेश।
  3. प्रतिषेध: निचली अदालतों को उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने से रोकना।
  4. उत्प्रेषण: किसी गलत न्यायिक फैसले को रद्द करना।
  5. अधिकार पृच्छा: किसी व्यक्ति से सरकारी पद पर रहने का अधिकार पूछना।

राहुल गांधी का तर्क क्या है? राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक का तर्क है कि वोट देने का अधिकार न केवल एक लोकतांत्रिक अधिकार है, बल्कि यह मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। चुनाव आयोग पर सॉफ्टवेयर में बदलाव और फॉर्म-6 के दुरुपयोग के जरिए वोट चोरी का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने इसे सीधे तौर पर जनता के संवैधानिक हक पर हमला बताया है।

अनुच्छेद-32 का उपयोग करके विपक्ष ने इस मामले को प्रशासनिक विवाद से निकालकर सीधे मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की श्रेणी में खड़ा कर दिया है, जिससे अब सुप्रीम कोर्ट के लिए इस पर संज्ञान लेना संवैधानिक कर्तव्य बन गया है।

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