चुनाव आयोग पर सियासत: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का विपक्ष पर तीखा हमला, कहा- लोकतंत्र को बंधक न बनाएं
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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने चुनाव आयोग की साख और निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले विपक्षी दलों को सख्त नसीहत दी है। उन्होंने साफ कहा है कि भारत के लोकतंत्र को किसी भी पार्टी की राजनीतिक सुविधा का बंधक नहीं बनाया जा सकता।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने मोर्चा खोल रखा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जब चुनावी नतीजे विपक्ष के अनुकूल नहीं होते, तभी चुनाव आयोग पर सवाल उठाने की राजनीति शुरू होती है।

पूर्व अधिकारियों का मिला साथ

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने सोशल मीडिया पर 124 पूर्व IAS, IFS और अन्य संबद्ध सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जारी किए गए समर्थन पत्र का हवाला दिया। इन सेवानिवृत्त अधिकारियों का मानना है कि चुनाव आयोग एक विश्वसनीय संस्था है और उस पर बिना ठोस साक्ष्यों के आरोप लगाना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

इन पूर्व अधिकारियों ने चुनावी सुरक्षा के कड़े इंतजामों का जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदान एजेंटों की मौजूदगी, EVM की सीलिंग, स्ट्रॉन्ग रूम की कड़ी सुरक्षा और VVPAT पर्चियों के सत्यापन जैसी प्रक्रियाएं चुनाव को पारदर्शी बनाती हैं।

SIR और मतदाता सूची पर विवाद

मौजूदा राजनीतिक घमासान का मुख्य केंद्र मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के नाम पर मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं और निष्पक्षता से समझौता किया जा रहा है।

इसी मुद्दे पर कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तक कर दी है। दूसरी तरफ, आयोग और उसके समर्थकों का कहना है कि मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाना एक निरंतर और आवश्यक प्रक्रिया है।

चुनिंदा लोकतंत्र पर प्रहार

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विपक्ष के दोहरे रवैये पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल अपनी सुविधानुसार लोकतंत्र की दुहाई देते हैं। जब संस्थान उनके हितों के अनुकूल काम करते हैं, तब वे ठीक होते हैं, लेकिन हार मिलने पर तुरंत उन पर सवाल उठा दिए जाते हैं।

रेखा गुप्ता ने जोर देकर कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए एक मजबूत और पारदर्शी चुनाव आयोग का होना अनिवार्य है। उन्होंने विपक्षी दलों को नसीहत दी कि यदि उन्हें चुनाव प्रक्रिया पर कोई शिकायत है, तो उसे तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर उठाया जाना चाहिए, न कि निराधार बयानों के जरिए संस्थाओं को बदनाम करना चाहिए।

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