अर्थव्यवस्था की जटिल गुत्थी सुलझाने वाले हॉल और वुडफोर्ड को मिला इकोनॉमिक्स का नोबेल
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अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार 2026 की घोषणा कर दी गई है। इस साल यह प्रतिष्ठित सम्मान रॉबर्ट ई. हॉल और माइकल वुडफोर्ड को दिया गया है। उन्हें यह पुरस्कार मैक्रोइकॉनॉमिक स्टेबलाइजेशन के माइक्रोइकॉनॉमिक आधार पर उनकी क्रांतिकारी रिसर्च के लिए मिला है।

क्या है इनका काम? हॉल और वुडफोर्ड का शोध यह समझने में मदद करता है कि व्यक्तिगत स्तर पर लोगों और कंपनियों द्वारा लिए गए आर्थिक फैसले पूरी अर्थव्यवस्था की स्थिरता को कैसे प्रभावित करते हैं। उनकी रिसर्च ने न्यू कीनेसियन मॉडल को जन्म दिया, जिसका उपयोग आज दुनिया भर के सेंट्रल बैंक और वित्त मंत्रालय अर्थव्यवस्था को संतुलित रखने के लिए करते हैं।

संकट के दौर में ढाल बनी रिसर्च नोबेल कमेटी ने बताया कि इनकी रिसर्च ने बड़े आर्थिक संकटों को संभालने के तरीके को बदल दिया है। महामारी और हालिया ऊर्जा संकट के दौरान यह रिसर्च बेहद कारगर साबित हुई। इन्ही मॉडल्स की बदौलत इन संकटों का विकास और महंगाई पर वैसा भयानक असर नहीं पड़ा, जैसा 1970 के दशक में देखा गया था।

मंदी के दौर का छोटा होना कमेटी के अनुसार, इन दोनों वैज्ञानिकों के काम की वजह से दुनिया 1930 जैसी महामंदी के दौर से बच सकी है। हालांकि आर्थिक उतार-चढ़ाव पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, लेकिन इनकी रिसर्च ने यह सुनिश्चित किया है कि मंदी और उच्च महंगाई के दौर कम समय तक ही टिकें।

पुरस्कार और अन्य विजेता अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार की राशि 12 लाख डॉलर है। इस साल अन्य श्रेणियों में भी दिग्गजों को सम्मानित किया गया है:

हॉल और वुडफोर्ड का यह सम्मान वैश्विक आर्थिक नीतियों को एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा है, जिससे भविष्य में आने वाली चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।

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