यह शक्तियों के बंटवारे का उल्लंघन है : मुख्य न्यायाधीश ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मिलने से किया इनकार
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भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के साथ बैठक करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। सीजेआई ने दोनों नेताओं को एक औपचारिक पत्र लिखकर अपनी असमर्थता और इसके पीछे के संवैधानिक कारणों को स्पष्ट किया है।

क्या है पूरा मामला? कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 10 अक्टूबर को सीजेआई को पत्र लिखकर मिलने का समय मांगा था। वे चुनावी आयोग, छात्रों की गिरफ्तारी, मेट्रो बंदी और ट्रेनों के रद्द होने जैसे मुद्दों पर अपना ज्ञापन सौंपना चाहते थे।

क्यों ठुकराई गई मुलाकात? सीजेआई सूर्यकांत ने अपने पत्र में तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिन मुद्दों पर चर्चा के लिए समय मांगा गया है, वे सभी मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबित मामलों पर चर्चा करने के लिए बैठक बुलाना शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) के सिद्धांत का पूरी तरह उल्लंघन होगा। सीजेआई के अनुसार, यह सिद्धांत संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है और ऐसी मुलाकात न्यायिक मर्यादा के विरुद्ध होगी।

प्रशासनिक नहीं, न्यायिक प्रक्रिया का करें उपयोग सीजेआई ने नेताओं को याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट के पास इन मामलों पर कोई प्रशासनिक शक्ति नहीं है। उन्होंने सलाह दी कि ज्ञापन सौंपने के बजाय, उन्हें कानून की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

उन्होंने कहा, संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए बाध्य है। आप प्रशासनिक पक्ष पर ज्ञापन देने के बजाय, याचिका दर्ज कराएं।

याचिका के लिए रास्ता साफ सीजेआई ने जानकारी दी कि इसी तरह के मुद्दों से जुड़ी कुछ याचिकाओं पर मंगलवार, 13 अक्टूबर को सुनवाई होनी है। उन्होंने सुझाव दिया कि कांग्रेस नेता अपनी याचिका व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट में जमा कर सकते हैं या ई-फाइलिंग का विकल्प चुन सकते हैं।

सीजेआई ने भरोसा दिलाया है कि यदि याचिकाएं नियमानुसार दाखिल की जाती हैं, तो उन पर कानून के तहत जल्द से जल्द सुनवाई की जाएगी।

इंडिया गठबंधन की आगे की रणनीति बता दें कि इस पूरे घटनाक्रम के बीच इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की योजना बनाई है। कांग्रेस का मानना है कि वे अपनी चिंताओं को देश की सर्वोच्च अदालत के समक्ष मजबूती से रखना चाहते हैं। सीजेआई के रुख के बाद अब सभी की निगाहें इस मार्च और उसके बाद होने वाली कानूनी कार्यवाही पर टिकी हैं।

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